योगगुरू बाबा रामदेव की बढ़ी मुश्किलें, आईएमए ने की मांग-रामदेव पर दर्ज हो राजद्रोह का मामला

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Yoga Guru Baba Ramdev

एलोपैथी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले योगगुरू बाबा रामदेव की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. दरअसल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बाबा रामदेव पर तत्काल राजद्रोह के आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. इसके साथ ही आईएमए ने बाबा रामदेव के खिलाफ आईपी एस्टेट थाने में शिकायत दर्ज कराई है. इसमें कहा कि बाबा रामदेव कोरोना के इलाज को लेकर भ्रम फैला रहे है, जो एक अपराधी की श्रेणी में आता है.

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बाबा रामदेव पर राजद्रोह का होगा मुकदमा?

दरअसल, इससे पहले आईएमए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि कोरोना के उपचार के लिए सरकार के प्रोटोकॉल को चुनौती देने और टीकाकरण पर कथित दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के लिए योगगुरु रामदेव पर तत्काल राजद्रोह के आरोपों के तहत मामला दर्ज होना चाहिए. आईएमए ने रामदेव को मानहानि का नोटिस भी भेजा है. संघ ने उनसे 15 दिन के अंदर माफी मांगने को कहा है और ऐसा नहीं होने पर वह उनसे एक हजार करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति राशि मांगेगा.

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रामदेव के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत

अब इस मामले में आईएमए की ओर से रामदेव के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. आईएमए के मानद महासचिव जयेश लेले की ओर से दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन में दर्ज 14 पन्नों की शिकायत में कहा गया है कि रामदेव ने अपने बयान से चिकित्सा पेशे और डॉक्‍टर्स को बदनाम करने की कोशिश की है.

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आईएमए ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी

आईएमए ने मोदी को लिखी चिट्ठी कहा कि यह बड़ी संतोषजनक बात है कि देश में टीकों की दोनों खुराक ले चुके केवल 0.06 प्रतिशत लोगों को कोरोना वायरस का ‘मामूली’ संक्रमण हुआ और टीका लगवा चुके लोगों को फेफड़ों में अत्यंत गंभीर संक्रमण होने के मामले ‘बहुत दुर्लभ’ रहे.

संगठन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया, ‘हम आपसे अपील करते हैं कि अपने कंपनी के उत्पादों के निहित स्वार्थ के चलते टीकाकरण पर डर का संदेश फैलाने वाले और भारत सरकार के उपचार प्रोटोकॉलों को चुनौती देने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें. हमारे विचार से यह स्पष्ट रूप से राजद्रोह का मामला है और ऐसे लोगों पर बिना किसी देरी के राजद्रोह के आरोपों में फौरन मुकदमा दर्ज होना चाहिए.’

जानिए बाबा रामदेव ने क्या दावा किया था?

रामदेव ने वायरल हुए वीडियो में जारी अपने बयान को रविवार को वापस ले लिया था. इसमें उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए इस्तेमाल कुछ दवाओं पर सवाल उठाते हुए और यह कहते सुना जा सकता है कि ‘कोविड-19 के इलाज में एलोपैथिक दवाएं लेने की वजह से लाखों लोग मर गए.’ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी रामदेव से इस ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ बयान को वापस लेने को कहा था.

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