कहां गई कोरोना की 4 करोड़ वैक्सीन की डोज, प्रोडेक्शन और वैक्शीनेशन से मेल नहीं खा रहे आंकड़े

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Covaxin

हिंदुस्तान में इस वक्त कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम तेजी से चल रहा है. क्योंकि कोरोना वायरस का सबसे बड़ा हथियार वैक्सीन को ही माना गया है और देश में अबतक करीब 20 करोड़ से भी ज्यादा वैक्सीन के डोज लगाई जा चुकी है. इन सबके बावजूद इस वक्त यही वैक्सीन अब सवालों के घेरे में है. दरअसल, हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक में बनी कोवैक्सिन के प्रोडेक्शन पर अब सवाल उठने लगे है. एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक 27 मई की सुबह तक कोवैक्सिन के 2.1 करोड़ डोज का इस्तेमाल किया जा है, जबकि प्रोडेक्शन के हिसाब से भारत में अबतक 6 करोड़ से ज्यादा कोवैक्सिन होनी चाहिए थी. मगर वैक्सीन और प्रोडेक्शन के जो आंकड़े हैं वो मेल नहीं खा रहे हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक की ओर से अब तक करीब 8 करोड़ वैक्सीन बनाए गए होंगे. इसमें 2.1 करोड़ कोवैक्सिन की डोज का इस्तेमाल बीते गुरूवार (27 मई) की सुबह तक किया जा चुका है और एक अनुमान के मुताबिक करीब 2 करोड़ कोवैक्सीन की डोज विदेशों में भेजी गई होगी. अब बाकी बचे 4 करोड़ वैक्सीन की डोज कहां गई. रिपोर्ट में दावा किया गया कि वैक्सीन का इस्तेमाल और प्रोडेक्शन का जो आंकड़ा है वो मेल नहीं खा रहा है.

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मालूम हो भारत बायोटेक ने 20 अप्रैल को अपने एक बयान में कहा था कि मार्च में कोवैक्सिन के 1.5 करोड़ डोज का प्रोडेक्शन किया गया था और अप्रैल में 2 करोड़ डोज का प्रोडेक्शन किया गया था. जो मई से बढ़ने की संभावना जताई गई थी. वहीं भारत बायोटेक के सीएमडी कृष्णा एला ने भी कहा था कि मई में उत्पादन 3 करोड़ होगा.

याद हो केंद्र ने वैक्सीन को लेकर हाईकोर्ट में दो अलग-अलग हलफनामें दाखिल किए थे. इनमें से एक में 24 मई को कहा गया था कि भारत बायोटेक एक महीने में कोवैक्सिन के 2 करोड़ डोज तैयार कर रहा है. 5 जनवरी को वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत होने से पहले ही एला ने कहा था कि कंपनी ने वैक्सीन के 2 करोड़ डोज का स्टॉक कर लिया है.

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कंपनी के बयानों पर नजर डालें, तो अबतक करीब 8 करोड़ डोज का प्रोडेक्शन होना चाहिए था अगर हम यह मान लें कि जनवरी से लेकर मार्च तक प्रोडेक्शन कम भी हुआ होगा, तो भी कंपनी के पास 8 करोड़ डोज होनी चाहिए. वहीं, अब बात करें वैक्सीन के विदेश भेजने की, तो भारत ने डिप्लोमेसी की वजह से वैक्सीन के कुछ डोज विदेशों को दिया था. सरकार के अनुसार अब तक करीब 6.6 करोड़ वैक्सीन के डोज विदेश भेजे गए. इनमें से अधिकतर कोविशील्ड के डोज थे. ऐसे में सरकार ने अगर 2 करोड़ कोवैक्सिन के डोज विदेश भेजे हैं तो भी 4 करोड़ और डोज देश के पास बचे होने चाहिए.

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अगर सीधा-सीधा हिसाब लगाया जाए, तो 2 करोड़ कोवैक्सिन की डोज देश में लगाए गए, 2 करोड़ डोज विदेश भेजे गए. कंपनी की कार्य क्षमता के हिसाब से अब तक 8 करोड़ डोज का प्रोडेक्शन किया गया होगा. ऐसे में 4 करोड़ वैक्सीन के डोज कहां गए? बता दें, इस साल के शुरूआत से ही सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेके की कोवैक्सिन का इस्तेमाल किया जा रहा है और अब भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के प्रोडेक्शन को लेकर सवाल उठने लगा है आखिर इतनी भारी मात्रा की वैक्सीन कहां गई जब देश को इन वैक्सिनों की सबसे ज्यादा जरूरत है.

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