पश्चिम बंगाल चुनाव बना उम्मीदवारों की मौत का गढ़, अब तक कई प्रत्याशी काल के गाल में समा चुके

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कोरोना काल के बीच पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच चुनावी महासंग्राम छिड़ा है। इसी बीच सूबे में कई राजनेता कोरोना की चपेट में आ रहे है। सबसे पहले मुर्शिदाबाद में कांग्रेस के उम्मीदवार की कोरोना की वजह से मौत हो गई। इसी बीच खरदाहा से टीएमसी प्रत्याशी काजल सिन्हा की मौत हो गई। इसके अलावा कोरोना संक्रमित कई नेता अस्पतालों और घरों में आइसोलेट हैं। टीएमसी प्रत्याशी के निधन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने काजल की मौत पर दुख व्यक्त किया। ममता बनर्जी ने ट्वीट पर लिखा ‘कोविड-19 की वजह से काजल सिन्हा की मौत की समाचार से बहुत उदास और स्तब्ध हूं, जनता की सेवा के लिए उनका जीवन समर्पित था। चुनाव प्रचार अभियान में उन्होंने जमकर पसीना बहाया था। मेरी संवेदना उनके परिवार के प्रति है। ईश्वर परिजनों को दुख की घड़ी सहने की शक्ति प्रदान करें’।

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पश्चिम बंगाल में कोरोना से हो रही मौतें

बता दें, इससे पहले 16 अप्रैल को बंगाल के मुर्शिदाबाद से कांग्रेस के प्रत्याशी रजाउल हक की मौत हो गई थी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच कोरोना महामारी कहर बनकर टूट रही है। राज्य में कई नेता कोरोना संक्रमित हैं। भाजपा, टीएमसी, कांग्रेस समेत लेफ्ट पार्टी के नेता कोरोना पॉजिटिव हैं। वहीं गोआलपोखोर से टीएमसी के प्रत्याशी गुलाम रब्बानी कोरोना संक्रमण के शिकार हैं। जबकि प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा भी संक्रमित हो गए। दरअसल, राज्य में कोरोना से लगातार मौतें हो रही हैं। बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 14,285 नए केस सामने आए हैं। जबकि 59 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में कोरोना से मरनेवालों की संख्या 10,884 हो गई है। वहीं सूबे में कोरोना संक्रमितों की संख्या 7,28,061 हो गई है।

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चुनाव आयोग ने 13 के खिलाफ एफआईआर दर्ज

वहीं चुनाव आयोग ने 13 उम्मीदवारों के खिलाफ कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ने को लेकर एफआईआर दर्ज करवाई है. वहीं 33 नेताओं को नोटिस भी भेजा है। ऐसे में सवाल है कि कोरोना काल में आखिर नेताजी बार-बार कोरोना प्रोटोकॉल को क्यों तोड़ रहे हैं? आखिर क्यों नेताजी कोरोना की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं या फिर राजनीति कोरोना पर भारी पड़ गई है. दरअसल 7वें चरण का मतदान चल रहा है और 8वें चरण की वोटिंग अभी होनी है, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने रैलियों और प्रचार पर अंकुश लगा दिया है. देश की अग्रणी पार्टी बीजेपी और बंगाल में ममता की पार्टी टीएमसी किसी भी तरह प्रचार को कम करने के मूड में दिख नहीं रही है. ऐसे में सवाल तो बनता ही है कि नेता कोरोना प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं?

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