घड़ी की दुकान, झुग्गी झोपड़ी और प्लैट से चलाई जा रहीं राजनीतिक दलों ने लिया कई सौ करोड़ का चंदा, IT की रेड में खुलासा

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देश की तमाम राजनीतिक दलों को कई तरह का चंदा मिलता है. इसमें बड़े दल और छोटे दल सभी शामिल है. हालांकि, बड़े दल इसका लेखा-जोखा रखते है और बकायदा इसका टैक्स भी जमा करते है, लेकिन छोटे दलों के पास इसका ना तो कोई लेखा-जोखा होता है. वो सिर्फ नाम के लिए राजनीतिक दल चलाते है. ना तो उनका कोई दफ्तर होता है और ना ही कोई संगठन होता है, लेकिन उनका मिलने वाले डोनेशन जरूर रख लेते है. हालांकि राजनीतिक दल के रूप में उनका रजिस्ट्रेशन जरूर है. इसका खुलासा हाल ही में हुई इनकम टैक्स की रेड में हुआ है.

दरअसल, टैक्स चोरी और पॉलिटिकल फंडिंग के मामले में इनकम टैक्स ने बुधवार को देशभर के तमाम हिस्सों में एक साथ छोपेमारी की. इस दौरान पता चला है कई ऐसे दल हैं, जो झुग्गी झोपड़ी, घड़ी की दुकान और फ्लैट से चलाए जा रहे हैं. इनकम टैक्स ने ऐसे ही कुछ दफ्तरों में छापा मारा, तो इसका खुलासा हुआ. ये दल भी राजनीति के नाम पर डोनेशन ले रहे हैं, लेकिन उसका कोई लेखा-जोखा नहीं देते हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के सुल्तानपुर में एक राजनीतिक दल का दफ्तर घड़ी रिपेयर की दुकान में है. दुकानदार ही उस दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष है. छापे में खुलासा हुआ कि उसने पिछले तीन साल में 370 करोड़ रुपए डोनेशन के रूप में लिए है. पूछताछ में दुकानदार ने खुद को अध्यक्ष बताया, लेकिन चंदे के बारे में किसी जानकारी से इंकार किया. उसने आशंका जताई कि पार्टी का राज्य अध्यक्ष गुजरात में रहता है, उसके पास डोनेशन की जानकारी होगी.

इस जानकारी पर आयकर अधिकारी अहमदाबाद स्थित उसके घर से उसे पकड़ा तो उसने डोनेशन सर्टिफिकेट देने की बात स्वीकारी. पूछताछ में उसने बताया कि उसे तीन प्रतिशत कमीशन के साथ यह सर्टिफिकेट देता है. बाकी का पैसा कई स्तरों पर अलग-अलग लोगों से गुजरते हुए नकद में दान करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को वापस कर दिया जाता है. ऐसी दो और पार्टियों को उत्तर प्रदेश में इस काम में शामिल किया गया है, उससे पूछताछ के आधार पर अधिकारी मुंबई के सायन स्थित घनी झुग्गी-झोपड़ी में पहुंचे और सौ वर्ग फुट की छोटे से कमरे में एक अन्य पार्टी का पंजीकृत कार्यालय मिला. इस पार्टी के बैंक रिकॉर्ड के अनुसार इसने पिछले दो वर्षों में लगभग 100 करोड़ रुपए का चंदा स्वीकार लिया है.

मीडिया सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने चंदा में लगभग 100 करोड़ रुपए लिए और उसी के लिए प्रमाण पत्र प्रदान दिया. इनका उपयोग वे लोग आयकर के तहत की तरह की छूट लेने में करते हैं. चंदे की राशि से पार्टी के लिए 0.01 प्रतिशत की कटौती के बाद पार्टी के लिए ऑडिटर द्वारा बनाई गई संस्थाओं और फर्मों की कई लेयर से गुजार कर नकद में वापस कर दी जाती है. मुंबई के बोरीवली में भी ऐसे कई दफ्तरों का पता चला है.

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