वाराणसीः ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी केस में आ गया अदालत का फैसला, आगे भी होगी सुनवाई, हिंदू पक्ष में खुशी की लहर

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उत्तर प्रदेश की वाराणसी में जिला अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने सोमवार (12 अगस्त) को ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और विग्रहों के संरक्षण को लेकर फैसला दिया है, जिससे हिंदू पक्ष में खुशी की लहर फैल गई है. जिला जज डॉ. अजय कृष्‍ण विश्‍वेश की अदालत में टेनेबिलिटी यानी पोषणीयता पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद केस में आगे सुनवाई होगी. इस मामले में अब अगली सुनवाई 22 सिंतबर को होगी. दरअसल, अदालत को आज यही फैसला करना था कि यह याचिका सुनने योग्य है या फिर नहीं. वहीं, मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई है.

जिला अदालत ने जैसे ही अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया तैसे-तैसे वहां पर हर-हर महादेव के नारे लगने लगे. इस मामले में याचिकाकर्ता महिलाओं का कोर्ट परिसर में स्वागत किया गया. सभी पक्षकार और वकील कोर्ट रूम में मौजूद रहे. जज का फैसला करीब 15 से 17 पेज का है. अदालत परिसर से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे. यह आदेश ऑर्डर 7 रूल नंबर 11 के आधार पर दिया गया. अगर, इसको आसान भाषा में समझे, तो इसके तहत कोर्ट किसी केस में तथ्यों की मेरिट पर विचार करने के बजाए सबसे पहले ये तय किया जाता है कि क्या याचिका सुनवाई करने लायक है भी या नहीं.

अदालत के फैसले के बाद हिंदू पक्ष की महिला याचिकाकर्ता मंजू व्यास ने खुशी से सराबोर होकर कहा, ‘आज पूरा भारत खुश है. सभी हिंदू भाइयों और बहनों से अपील है कि आज घर में दिया जरूर जलाएं.’

वहीं, ज्ञानवापी मामले के मद्देनजर वाराणसी पुलिस कमिश्‍नर ए. सतीश गणेश के आदेश के बाद कमिश्‍नरेट क्षेत्र में धारा-144 लागू है. पुलिस और प्रशासनिक अमला हाई अलर्ट पर है. सभी थानेदार, ACP, ADCP, और DCP को अतिरिक्‍त सतर्कता के साथ ड्यूटी कर रहे हैं. सोशल मीडिया की निगरानी की जा रही है. पुलिस धर्मगुरुओं के लगातार संपर्क में है.

बता दें, वाराणसी की जिला जज की अदालत में 26 मई से सुनवाई शुरू होने पर पहले 4 दिन मुस्लिम पक्ष और बाद में वादी हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें पेश की गईं. इसके बाद दोनों पक्षों ने जवाबी बहस की और लिखित बहस भी दाखिल की. मुस्लिम पक्ष का कहना था कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्‍फ की संपत्ति है. आजादी के पहले से वक्‍फ एक्‍ट में दर्ज है. इससे संबंधित दस्‍तावेज भी पेश किए गए. वहीं मस्जिद के संबंध में 1936 में दीन मोहम्‍मद केस में सिविल कोर्ट और 1942 में हाई कोर्ट के उस फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि यह मुकदमा सीपीसी ऑर्डर-7 रूल 11 के तहत सुनवाई योग्‍य नहीं है.

उधर, हिंदू पक्ष की ओर से वक्‍फ संबंधी दस्‍तावेजों को फर्जी बताने के साथ कहा गया कि ज्ञानवापी में नीचे आदि विश्‍वेश्‍वर का मंदिर है. ऊपर का स्‍ट्रक्‍चर अलग है. जब तक किसी स्‍थल का धार्मिक स्‍वरूप तय नहीं हो जाता तब तक प्‍लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्‍ट-1991 प्रभावी नहीं माना जाएगा. जिला जज ने 24 अगस्‍त को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया.

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