ट्विटर को भारत सरकार की दो टूक, कहा – हम जानते हैं अभिव्यक्ति की आजादी, लेकिन सभी को मानने होंगे देश के कानून

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माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर और भारत सरकार के बीच जारी मतभेदों के बीच केंद्र के आईटी सेक्रेटरी और ट्विटर के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक वर्चुअल बातचीत हुई. भारत सरकार ने इस चर्चा की पुष्टि करते हुए कहा कि मंत्रालय के सचिव और ट्विटर की वाइस प्रेसिडेंट (ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी) मोनिके मेशे ने आपस में चर्चा की है.

ट्विटर पर कसा सरकार का शिकंजा

ट्विटर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (ए) के उल्लंघन का आरोप है. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 ए के तहत 257 यूआरएल और एक हैशटैग ब्लॉक करने के लिए मंत्रालय ने 31 जनवरी को एक अंतरिम आदेश पारित किया था.

देश की अखंडता और कानून का सम्मान करना ही होगा- सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कंपनी के अपने भले ही कोई नियम हों, लेकिन उसे देश के कानूनों का पालन करना ही चाहिए. बड़ी बात ये कि मंत्रालय ने ट्विटर से टकराव के बीच तमाम मंत्रियों से एक स्वदेशी ऐप संदेश पर अकाउंट बनवाए और अपने बयान को भी इसी ऐप पर जारी किया.

लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखे ट्विटर

भारत सरकार ने इस बातचीत में ट्विटर से सरकारी नियमों के अनुपालन करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखने के लिए कहा. वहीं ट्विटर ने 500 से अधिक एकाउंट निलंबित किये हैं. हालांकि उसने अभिव्यक्ति की आजादी को अक्षुण्ण रखने की जरूरत का हवाला देते हुए पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के एकाउंट पर रोक लगाने से इनकार किया है.

संविधान के नियमों का जिक्र

वर्चुअल डिस्कशन के दौरान मंत्रालय के सचिव अजय साहनी ने ट्विटर के अधिकारियों से कहा कि भारत सरकार अभिव्यक्ति की आजादी के सिद्धांतों का सम्मान करती है. यह देश के लोकतंत्र का हिस्सा है और इसके लिए संविधान में प्रावधान भी हैं. लेकिन यह आजादी निरंकुश नहीं है और इसपर जरूरी प्रतिबंध लागू होते हैं. सरकार ने अपने बयान में कहा कि प्रतिबंधों की यह बात संविधान से आर्टिकल 19 (2) में लिखी हुई हैं. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी समय-समय पर इसे लेकर तमाम फैसले दिए हैं.

ट्विटर को भारतीय कानूनों को मानना ही होगा

सरकार ने ट्विटर के अधिकारियों से यह भी कहा कि उनकी कंपनी का भारत में बिजनस करने के लिए स्वागत है, लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जबकि वह भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करे. सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि किसी भी कंपनी को देश में होने पर भारतीय संसद के द्वारा पारित कानूनों का पालन करना ही होगा. भले ही इससे इतर कंपनियों के नियम जैसे भी हों.

दो बार भारत की अखंडता पर ट्विटर चोट कर चुका है

नवंबर 2020 में भारत का गलत नक्शा दिखाने पर मोदी सरकार ने सख्ती दिखाई तो Twitter ने माफी मांगी ली थी. मामले में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने ट्विटर के ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट को एक नोटिस भेजा, जिसमें लिखा था कि ट्विटर ने यह जान-बूझकर किया है. लेह को जम्मू-कश्मीर के हिस्से के रूप में दिखाकर भारत की संप्रभु संसद की इच्छा को कम करने के लिए ये कदम उठाया है. ट्विटर ने संसदीय समिति से लिखित में माफी मांग ली थी.

वहीं अक्टूबर 2020 में ट्विटर ने कश्मीर को चीन का हिस्सा बताया थी. सरकार ने ट्विटर को भारतीय नागरिकों की संवेदनशीलता का सम्मान करने को कहा है. सरकार ने यह भी साफ कहा है कि भारत की संप्रभुता व अखंडता का असम्मान करने का ट्विटर का कोई भी प्रयास जैसा कि मानचित्र के मामले में किया गया है. पूरी तरह से गैरकानूनी और अस्वीकार्य है.

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