सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लगाई फटकार, कहा- मदद मांगने वालों पर कार्रवाई की, तो मानेंगे अवमानना

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हिंदुस्तान में तेजी से फैल रहे कोरोना महामारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (30 अप्रैल) को सुनवाई शुरू हो गई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि केवल राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों की ही जांच होगी।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि केंद्र सरकार 100 फीसदी टीकों की खरीद क्यों नहीं करती। इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के मॉडल पर राज्यों को वितरित क्यों करती ताकि वैक्सीन की कीमतों में अंतर ना रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरकार यह देश के नागरिकों के लिए है।

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अनपढ़ और इंटरनेट ना एक्सेस करने वाले लोग कैसे लगवाएंगे वैक्सीन?

इसके अलवा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारे सामने कुछ ऐसी भी याचिकाएं दायर की गई हैं, जो गंभीर रूप से स्थानीय मुद्दों को उठाती है, उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मुद्दों को उच्च न्यायालय में उठाया जाना चाहिए। वहीं पीठ ने सवाल किया कि अनपढ़ या जिनके पास इंटरनेट एक्सेस नहीं है, वे कैसे वैक्सीन लगवाएंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल पूछा- कोरोना मरीजों की राष्ट्रीय नीति क्या है?

अदालत ने आगे कहा कि पिछले एक साल में केंद्र सरकार ने वैक्सीन कंपनियों पर कितना निवेश किया और कितनी अग्रिम राशि दी? यही नहीं केंद्र को फटकारते हुए कोर्ट ने कहा कि क्या केंद्र सरकार मरीजों के लिए अस्पतालों में दाखिले पर कोई राष्ट्रीय नीति बना रहा है? क्या मूल्य निर्धारण को विनियमित किया जा रहा है।

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वहीं, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा ऐसा करने पर हम उसे अवमानना मानेंगे। हमें अपने नागरिकों की आवाज सुननी चाहिए और ना कि उनकी आवाज को दबाना चाहिए। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या भारत में ऑक्सीजन की उपलब्धता पर्याप्त है जबकि प्रति दिन 8,500 मीट्रिक टन की औसत मांग है।

इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 10,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दैनिक आधार पर उपलब्ध है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ राज्यों द्वारा कम ऑक्सीजन लेने के कारण कुछ क्षेत्रों में उपलब्धता कम हो जाती है।

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