जिसे बनाकर भेजा ‘दूत’, उसने भी ‘उद्धव’ से की ‘बगावत’!

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वक्त बीतने के साथ ही महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट और भी ज्यादा गहराता जा रहा है. आलम, यह है कि उद्धव ठाकरे से बागवत करने वाले एकनाथ शिंदे ‘शिवसेना’ के नए बाल ठाकरे बनते दिख रहे है. दरअसल, उद्धव ठाकरे ने बागी नेताओं को मनाने के लिए अपना दूत भेजा था, लेकिन बागी नेता तो नहीं मानने, उल्टा दूत ही शिंदे खेमे में शामिल हो गया. अब उद्धव के लिए इससे बुरा और क्या हो सकता है.

बता दें, उद्धव ठाकरे के करीबी नेता और MLC रवींद्र फाटक भी बागी विधायकों से साथ शामिल हो गए है, उन्हें उद्धव ठाकरे ने 21 जून (मंगलवार) को विधायक मिलिंद नार्वेकर के साथ दूत बनाकर सूरत भेजा था, लेकिन वहां पहुंचने का बाद उन्होंने अपना पाला बदल लिया और 23 जून (गुरुवार) को शिंदे गुट में शामिल हो गए. ऐसे में कहा जा रहा है कि उद्धव को अभी और बड़े झटके लग सकते हैं. बताया जा रहा है कि फाटक के साथ दो विधायक संजय राठौड़ और दादाजी भूसे भी गुवाहाटी रवाना हो गए.

जिस शिवसेना को बाला साहेब ठाकरे ने खून-पसीने से सींचा था उस शिवसेना को उद्धव ठाकरे संभाल नहीं पा रहे है. आंकड़े और सूरत का हाल तो फिलहाल यहीं बयां कर रहे हैं. उद्धव ठाकरे के खेमे को एक के बाद एक झटका लग रहा है आगे अभी और बड़े झटके लग सकते हैं. उद्धव खेमे में अभी महज 13 विधायक बचे हैं और उनके करीबी भी पाला बदल रहे हैं. महाराष्‍ट्र के कम से कम 42 विधायक बागी शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे के साथ हो गए हैं. शिंदे ने मुख्‍यमंत्री उद्धव का जीना मुहाल कर रखा है. हालात, यही रहे तो बेटे आदित्‍य और संजय राउत के साथ इक्‍का-दुक्‍का और विधायकों के साथ वो खड़े दिखेंगे.

बता दें, 6 विधायकों के अलावा शिवसेना के MLC रवींद्र फाटक सूरत से भाजपा शासित प्रदेश असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंच गए. गुवाहाटी में ही शिवसेना के बागी विधायक डेरा डाले हुए हैं. फाटक उस दो-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जो शिंदे और दूसरे अन्य बागी विधायकों को मनाने और राजनीतिक संकट के हल के लिए सूरत के होटल में विचार-विमर्श के लिए वहां पहुंचे थे.

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