कोलकाता: डॉक्टरी के जादूगर ऐसे थे बिधान बाबू, महात्मा गांधी का किया था इलाज

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डॉक्टरी के जादूगर कहे जाने वाले बिधान बाबू मरीजों को महज देखकर उनका मर्ज बता देते थे, उन्होंने अपना सारा जीवन बीमार लोगों के इलाज में समर्पित कर दिया और जब राजनीति में कदम रखा तो वहां भी बतौर प्रशासक स्वास्थ्य संबंधी संरचना को बेहतर करने के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए। डॉ बिधान चंद्र रॉय, चिकित्सा जगत में अमू़ल्य अवदान के लिए जिनकी जयंती और पुण्यतिथि (डॉ. रॉय का जन्म व निधन दोनों एक जुलाई को हुआ था) को नेशनल डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है।

डॉ. बिधान चंद्र रॉय की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे जिस चीज में हाथ लगाते थे, वह सोना बन जाता था। चिकित्सा के साथ उन्होंने राजनीति में भी अपार सफलता हासिल की और बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने। राज्य के प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर ढेरों जिम्मेदारियां होने के बावजूद वे मरीजों का निःशुल्क इलाज करना नहीं भूले।

डॉ. रॉय महात्मा गांधी के व्यक्तिगत चिकित्सकों में से एक थे। सन् 1933 में जब महात्मा गांधी पुणे में अनशन कर रहे थे तो डॉ. रॉय उनके स्वास्थ्य की जांच करने वहां पहुंचे थे। गांधीजी ने उनसे दवा लेने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने बिधान बाबू से पूछा-'मैं आपसे इलाज क्यों कराऊं? क्या आप हमारे 40 करोड़ देशवासियों का मुफ्त में इलाज करते हैं? इसपर डॉ. राय ने कहा था-' मैं सारे लोगों का मुफ्त में इलाज नहीं कर सकता। मैं यहां मोहनदास करमचंद गांधी का नहीं बल्कि उस शख्स का इलाज करने आया हूं, जो मेरे देश के 40 करोड़ देशवासियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।' बिधान बाबू की यह बात सुनकर गांधीजी निरुत्तर हो गए थे और उन्होंने दवा ले ली थी।

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