ओमप्रकाश चौटाला की रिहाई तय करेगी हरियाणा की जाट लीडरशिप का चेहरा

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पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके ओमप्रकाश चौटाला की रिहाई के साथ ही प्रदेश की राजनीति करवट लेती दिखाई दे रही है। चौटाला की रिहाई के बाद प्रदेश की जाट लीडरशिप के लिए चुनौतियां पैदा हो गई हैं। दो बार के मुख्यमंत्री रह चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए चौटाला की रिहाई सबसे बड़ी चुनौती है। चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह ने अपने पिता की रिहाई के साथ ही हुड्डा को कठघरे में खड़ा कर दिया कि उन्हें जेल पहुंचाने का काम कांग्रेस ने किया था अब हुड्डा की जेल जाने की बारी है।

इसके जवाब में कांग्रेस की तरफ से सफाई दी गई है। अब कांग्रेस और इनेलो के इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रदेश की राजनीति रोचक मोड़ लेती नजर आ रही है। राज्य में सिरसा की ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर अभय चौटाला के इस्तीफे के बाद उपचुनाव होना है। ऐसे में चौटाला के लिए अपनी परंपरागत सीट को बचाने की कड़ी चुनौती होगी तो जाटों के नेता के रूप में स्थापित होने की मंशा भी जोर मारेगी। गौरतलब है कि हरियाणा की राजनीति काफी हद तक जाट मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमती है ।

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