गुजरात में कोरोना का आर्थिक असर, महिलाएं अपनी कोख किराए पर देने को मजबूर!

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कोरोना काल का भयावह समय ना जानें कब थमेगा? कब लोगों को इस महामारी से आजादी मिलेगी? जिस तेजी से कोरोना ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है, उतनी ही तेजी से लोगों का सब कुछ बरबाद हो गया है। आलम ये है कि लाशों को दाह संस्कार भी नसीब नहीं हो रहा है। इस महामारी को देखते हुए लोग इसके साथ जैसे-तैसे जी रहे थे, इस सोच में कि कभी तो इसका पूर्ण रुप से खात्मा होगा। लेकिन कोरोना काल के समय में आर्थिक मार ने लोगों को वो सब कुछ करने को मजबूर कर दिया है, जिसके बारे में सोचकर अफसोस होता है कि ये मेरे हिंदुस्तान की विडंबना है।

दरअसल, खबरों के अनुसार पूर्वी अहमदाबाद में एक ऐसा मामाला सामने आया है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा। एक 23 साल की युवती लोगों के घरों में काम झाडू-पौंछा कर के कैसे-जैसे अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं, लेकिन कोरोना के डर से लोग घर में काम कराने से डर रहे हैं, जिसके बाद से काम बंद होने से उसके सामने घर चलाने की समस्या खड़ी हो गई। ऐसे में किसी ने उसे सरोगेट मां बनने की सलाह दी। उसे ये रास्ता ठीक लगा। अब वह एक दंपती के बच्चे की सरोगेट मां बनने जा रही है। कोरोना के चलते कारोबार बंद होने से नौकरियां जा रही हैं। इसके चलते महिलाएं मजबूरी में कोख किराए पर दे रही हैं। सूत्रों के अनुसार गुजरात में ऐसे 20-25 मामले सामने आए हैं।

जो महिलाएं आर्थिक तंगी की मार के कारण सरोगेसी का रास्ता अपना रही है उसमें कुछ अविवाहित युवतियां भी हैं। इस काम के बदले इन्हें 3 से 4 लाख रुपए और मेडिकल खर्च मिलता है।

खबरों की मानें तो हर महिलाओं की अपनी एक समस्या है जिसके कारण वो अपनी कोख को किराए पर दे रही है। महिलाओं की समस्याओं में देखा गया है कि किसी के पापा ने घर छोड़ दिया, किसी की जॉब चली गई तो किसी का बिजनेस बंद हो गया और किसी के पति की नौकरी चली गई। ये वो कारण हैं जिनके कारण घर की महिलाओं को घर चलाने का दायित्व अपने सर पर लेना पड़ा और कोरोना काल में जॉब के अभाव में ये रास्ता अपनाना पड़ा।

सरकार चाहें तो मजबूरी में किए जा रहे इस कोख के कारोबार को रोक सकती है बस जरुरत है सरकार इन सब जरुरतमंदों की जरुरत का ध्यान रखें और उचित व्यवस्था करे।

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