देश को मिला पहला स्वदेशी INS विक्रांत, निर्माण में लगे 13 साल, जानिए इसकी खासियत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत नेवी को सौंपा. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेवी के नए नौसेना ध्वज का भी अनावरण किया. इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन मौजूद थे. INA विक्रांत पर विमान उतरने का परीक्षण नवंबर में शुरू होगा, जो 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा. 31 जनवरी 1997 को नेवी से INS विक्रांत को रिटायर कर दिया गया अब तकरीबन 25 साल बाद एक बार फिर से INS विक्रांत का पुनर्जन्म हो रहा है.

इस पोत का नाम ‘INS विक्रांत’ भारतीय नौसेना के पूर्ववर्ती पोत विक्रांत के नाम पर रखा गया है, जिसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी. इस पोत का डिजाइन नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है. वहीं, निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है. इस पोत पर आसानी से 30 विमानों का संचालन किया जा सकता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, विक्रांत बड़ा और भव्य है, विक्रांत अलग है, विक्रांत विशेष है. विक्रांत सिर्फ एक युद्धपोत नहीं है, यह 21वीं सदी के भारत की कड़ी मेहनत, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है. आज यहां केरल के समुद्री तट पर भारत, हर भारतवासी, एक नए भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है. INS विक्रांत पर हो रहा ये आयोजन विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह युद्धपोत से ज्यादा तैरता हुआ एयरफील्ड है, यह तैरता हुआ शहर है. इसमें जतनी बिजली पैदा होती है उससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है. इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फील्ड से बड़ा है. इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं वह कोचीन से काशी तक पहुंच सकते हैं. इसके एयरबेस में जो स्टील लगी है, वो स्टील भी स्वदेशी है.

जानिए INS विक्रांत की खासियत

विक्रांत 40 हजार टन वजन वाला विमान वाहक जहाज है. INS विक्रांत एयरक्राफ्ट करियर समुद्र के ऊपर तैरता एक एयरफोर्स स्टेशन है जहां से फाइटर जेट्स, मिसाइलें, ड्रोन के जरिए दुश्मनों के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूद किया जा सकता है.

दुनिया में केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के पास ही 40 हजार और इससे ज्यादा वजन वाले विमान वाहक जहाज का निर्माण करने की क्षमता है. आईएनएस विक्रांत से 32 बराक-8 मिसाइल दागी जा सकेंगी.

विक्रांत 20 मिग-29 लड़ाकू विमान और दस हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है. 2017 में आईएनएस विराट के रिटायर होने के बाद भारत के पास केवल एक विमान वाहक जहाज आईएनएस विक्रमादित्य है. INS विक्रांत पर 30 एयरक्राफ्ट तैनात होंगे, जिनमें 20 लड़ाकू विमान होंगे और 10 हेलीकॉप्टर होंगे.इस साल नवंबर के महीने से मिग-29के फाइटर जेट विक्रांत पर तैनात होने शुरु हो जाएंगे.

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