यूपी बंटवारे की उड़ी अफवाह, राज्य का नहीं होगा बंटवारा, यूपी के सूचना विभाग ने किया खबरों का खंडन

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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के बंटवारे की खबरें जैसे ही सुर्खियां बनी, तो राजनीतिक गलियारों में सियासत तेज हो गई. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली में हुई मुलाकात को उत्तर प्रदेश के विभाजन के साथ जोड़कर तमाम मीडिया संस्थान और सोशल मीडिया पर खबरें चलने लगी कि विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश को तीन हिस्सों में बांट दिया जाएगा. हालांकि, अब योगी सरकार खुद उत्तर प्रदेश के विभाजन वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूपी सरकार के सूचना विभाग ने एक बयान जारी कर प्रदेश के विभाजन वाली खबरों का खंडन किया है.

सूचना विभाग ने एक तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के विभाजन को लेकर जताई जा रही आशंका निराधार है, उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर .पी के बंटवारे को लेकर भ्रामक खबरें चलाई जा रही है, ये खबर पूरी तरह से गलत है. सूचना विभाग के मुताबिक ऐसी भ्रामक खबरे चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

दरअसल, यूपी में सियासी उठापठक के बीच ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव 2022 से पहले उत्तर प्रदेश को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है. जिसमें पहला उत्तर प्रदेश होगा, जिसकी राजधानी लखनऊ होगी, इसमें 20 जिले शामिल होंगे. दूसरा बुंदेलखंड जिसकी राजधानी प्रयागराज होगी, इसमें 17 जिले शामिल होंगे. तीसरा पूर्वांचल जिसकी राजधानी गोरखपुर होगी, इसमें 23 जिले शामिल होंगे.

बता दें, किसी भी राज्य बंटवारें के लिए केंद्रीय गृहमंत्री की भूमिका अहम होती है, साथ ही उस राज्य के राज्यपाल भी गोपनीय रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजकर राज्य के बंटवारे की प्रस्तुति कर सकते है. चूंकि बंटवारे का प्रस्ताव राज्य के दोनों सदनों यानी विधानसभा और विधानपरिषद से पास कराकर केंद्र को भेजना होता है, लिहाजा विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका जरूरी होती है. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राज्यपाल से मिलना फिर अचानक दिल्ली आना और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करना, उत्तर प्रदेश के बंटवारें को बल दे रहा था. इसी बीच सोशल मीडिया और तमाम मीडिया संस्थानों पर उत्तर प्रदेश के बंटवारे की खबरें आग कर तरह फैलने लगी. अगर वर्तमान परिस्थितियों को देखें, तो उत्तर प्रदेश का बंटवारा होना मुश्किल लगता है, विधानसभा चुनाव में मजह 8 महीने शेष बचे है. ऐसे में किसी राज्य के बंटवारे की प्रक्रिया लंबी होती है. संविधान का अनुपालन करते हुए तमाम तरह के दस्तावेजीकरण संबंधित कार्य पूरे करने होते हैं और इसकी तैयारी में वक्त लगता है. इस लिहाजे से उत्तर प्रदेश का बंटवारा फिलहाल मुश्किल लगता है.

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