भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च में खुलासा: संक्रमित मरीज के जाने के बाद भी 2 घंटे तक हवा में रहता है कोरोनावायरस

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कोरोना का कहर जिस तरह से लोगों को चपेट में ले रहा है ऐसे में बाहर निकलना मौत के मुंह में जाने के बराबर है। अगर आप बाहर निकलते हैं तो आपको नहीं पता आपके साथ या बगल में खड़ा व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं। अगर वो व्यक्ति कोरोना से संक्रमित होता है तो उसके वहां से जाने के बाद भी हवा में कोरोना वायरस की मौजूदगी 2 घंटे तक रहती है।

अगर आप ये सोच रहें हैं कि आप 2 गज की दूरी का पालन करते हुए कोरोना से बच जाएंगे, तो आप काफी हद तक गलत सोच रहे हैं। हवा में मौजूद कोरोना से बचाव में 2 मीटर की दूरी नाकाफी है।

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इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (इमटेक) चंडीगढ़, सेंट्रल इंस्ट्रुमंटेशन साइंटिफिक ऑर्गेनाइजेशन (सीएसआईओ) चंडीगढ़, सीसीएमबी हैदराबाद और कई सीएसआईआर की लैब की जॉइंट रिसर्च में यह सामने आया है। इस रिसर्च के आधार पर ही उन्होंने रहवासी और ऑफिस में बदलाव की सिफारिश की है।

इमटेक चंडीगढ़ की रिसर्च में कहा गया है कि संक्रमित व्यक्ति के कमरे से जाने के बाद भी 2 घंटे तक हवा में और 2 मीटर से अधिक दूरी पर वायरल पार्टिकल मौजूद रहते हैं। इससे बचने के लिए 2 मीटर नहीं बल्कि 3 मीटर तक की दूरी जरूरी है। सीएसआई, इमटेक, सीसीएमबी हैदराबाद व अन्य लैब की रिसर्च के आधार पर सीएसआईओ ने वेंटिलेशन की नई गाइडलाइंस तैयार की हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि वायरस के ड्रॉपलेट्स बोलने, गाना गाने, खांसने और छींकने से वातावरण में फैलते हैं। रिसर्च में बी इस बात पर प्रकाश डाला गया है। इस वायरस के फैलाव में कई चीजें जिम्मेदार हैं जैसे पार्टिकल रेस्पिरेट्री एक्टिविटी का प्रकार, हवा का फ्लो, दिशा, तापमान और पार्टिकल का साइज।

रिसर्च कहती है, वायरस के बड़े पार्टिकल तो जमीन पर गिर जाते हैं लेकिन छोटे पार्टिकल हवा में ही रह जाते हैं। जब कोई व्यक्ति वहीं पर सांस लेता है तो हवा में मौजूद इस वायरस की चपेट में आ कर संक्रमित हो जाता है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए अलग-अलग कीटाणुनाशक सॉल्यूशन का उपयोग करने की सिफारिश भी की है। ताकि रेजिडेंशियल और ऑफिस बिल्डिंग की एयर क्वालिटी बनी रहे।

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