राजस्थानः कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव के बीच राजस्थान में मुख्यमंत्री पद पर मुश्किल में गांधी परिवार!

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कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव के बीच राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी आलाकमान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है. क्योंकि यहां पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गुट के करीब 86 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है यह इस्तीफा डिप्टी सीएम रह चुके सचिन पायलट के विरोध में दिया गया है. दरअसल, सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की तैयारी में जुटे है. इधर, राजस्थान में मुख्यमंत्री पर को लेकर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है कि आखिर राजस्थान का मुखिया कौन होगा.?

हालांकि, शनिवार तक अशोक गहलोत यही कह रहे थे कि पार्टी आलाकमान का जो फैसला होगा, वो सर्वमान्य होगा, लेकिन रविवार रात को उन्होंने अपने समर्थक 82 विधायकों का इस्तीफा दिलाकर पार्टी आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दी है. अब इससे पार निकाल पाना कांग्रेस के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होगा.

फिलहाल, कांग्रेस आलाकमान यानी सोनिया और राहुल गांधी के पास 4 विकल्प हैं, लेकिन सबमें एक मुश्किल है. पहला विकल्प यह है कि कांग्रेस आलाकमान अशोक गहलोत को ही अध्यक्ष और सीएम दोनों पदों पर रहने दें. इससे चुनाव तक सियासी संकट टल जाएगा, लेकिन अशोक गहलोत फिर अध्यक्ष के तौर पर ज्यादा सक्रिय रहेंगे या फिर मुख्यमंकत्री पद पर ज्यादा काम करेंगे. यह भी देखने वाली बात होगी. इस विकल्प में बड़ी चिंता यह भी है कि कांग्रेस खुलेआम दोहराती रही है कि एक नेता और एक पद की नीति को लागू किया जाएगा. ऐसे में अशोक गहलोत को दो पद देने से कांग्रेस अपनी ही घोषित नीति से पलट जाएगी और विपक्ष कांग्रेस को घेरने से नहीं चुकेगी.

वहीं, कांग्रेस के पास एक विकल्प यह भी है कि गहलोत गुट के ही किसी नेता को मुख्यमंत्री बना दें. ऐसा होने पर अशोक गहलोत अध्यक्ष के तौर पर पूरा समय दे पाएंगे और राजस्थान की बगावत भी थम जाएगी, लेकिन इस विकल्प की समस्या यह है कि अशोक गहलोत का गुट तो मान जाएगा, लेकिन सचिन पायलट खेमा की बगावत जारी रहेगी. इस स्थिति में राजस्थान में कांग्रेस की हालत पंजाब सरीखी हो जाएगी, जहां चन्नी और नवजोत सिद्धू की आपसी कलह में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था. इसलिए पंजाब का सबक लेकर आगे बढ़ना भी कांग्रेस के लिए अहम होगा.

कांग्रेस आलाकमान के पास एक विकल्प यह भी है कि अध्यक्ष पद पर अशोक गहलोत को लाने का इरादा ही छोड़ दिया जाए. उनके स्थान पर किसी और नेता को अध्यक्ष बनाने का फैसला ले लिया जाए. इससे कांग्रेस को राजस्थान का सियासी संकट टालने में फिलहाल मदद मिल सकती है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में अब एक साल का भी वक्त नहीं बचा है. ऐसे में गुटबाजी से बचना ही सबसे जरूरी है, लेकिन इसके लिए पार्टी को नए सिरे से अध्यक्ष के तौर पर किसी और चेहरे की तलाश करनी होगी.

सचिन पायलट को अशोक गहलोत के तमाम विरोध के बाद भी कांग्रेस आलाकमान अपनी हनक दिखाने के लिए मुख्यमंत्री बना सकता है. हालांकि ऐसा करने पर पार्टी के आगे अशोक गहलोत की बगावत को बढ़ते देखने का विकल्प होगा, लेकिन इस फैसले से सोनिया और राहुल गांधी यह जरूर साबित कर सकते हैं कि असली बॉस अब भी वही हैं.

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