बढ़ते तेल के दामों से त्रस्त जनता!

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भगवती प्रसाद डोभाल (संपादकीय)

देश में बेतहाशा बढ़ते पेट्रोलियम पदार्थों से लेकर ईंधन में काम आने वाला पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, सीएनजी के दाम 125 रुपए का आंकड़ा कई राज्यों में छूनेवाला है, तब जाकर माननीय प्रधानमंत्री बोले. इससे पहले वे तब धड़ाधड़ केंद्र से कांग्रेस की सरकार को गिराने के लिए 2014 की मई से पूर्व बोलते वीडियो आप अपनी लाइब्रेरी में देख सकते हैं. वोटर को क्या पता था कि मोदीजी की सरकार हमें अच्छे दिन के बदले महंगाई की मार देगी.आज हर छोर से देश की जनता में हाहाकार मचा है, सिर्फ उच्च वर्ग को छोड़ कर, जिन्हें ऐसी मामूली बढ़त पर कोई फर्क नहीं पड़ता. फर्क तो मध्यम आय के वर्ग से शुरू हो कर निम्न मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है.


प्रधानमंत्री का प्रिय वोटरों को संदेश

हमारे प्रधानमंत्री जी ने अपने प्रिय वोटरों को संदेश दिया है कि ऐसी कठिनाई के लिए पूर्ववर्ती सरकार जिम्मेदार है. यानी सात वर्ष पूरे होने के बाद भी पिछली सरकारों को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराना कहां तक उचित है? इन सात वर्षों में आपकी सरकार ने क्या किया? लेकिन प्रधानमंत्री जी का मानना है कि ऊर्जा आयात की निर्भरता पर पिछली सरकारों ने ध्यान दिया होता, तो ऐसी दशा नहीं आती.

बहुत ही लाजवाब उत्तर है. जनता ने देश की दशा सुधारने के लिए एक नहीं दूसरी बार चुन कर भेजा है. इस उम्मीद में कि कोई बात नहीं पांच साल में आप स्थिति नहीं संभाल सके, तो एक चांस और आपको सुधार के लिए देते हैं, पर ऐसा कहीं से नहीं दिख रहा है, बजाए इसके अभी भी आप शासन, विरोधी कांग्रेस को आधार मान रहे हैं.


उपलब्धियां गिनाते प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री जी अपनी उपलब्धियां गिना रहे थे कि हमने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए 85 फीसदी तेल और 53 फीसदी गैस का आयात किया है. आगे कहते हैं कि गन्ने से निकाले जाने वाले इथेनॉल के उत्पादन से आयात को कम करने में मदद मिलेगी. इस पर वे आगे ईंधन में हो रही लगातार वृद्धि के बारे में समझाते हैं कि 2019-20 में भारत ने घरेलू मांगों को पूरा करने के लिए 85 प्रतिशत तेल और 53 प्रतिशत गैस का आयात किया है. पर यह आयात तो कांग्रेस शासन से कम मूल्यों पर हो रहा था, फिर महंगाई क्यों बढ़ाई?


तमिलनाडु में

एन्नौर-थिरुवल्लूर-बैंगलुरू-पुदुचेरी-नागापट्टिनम-मदुरै- तूतिकोरिन प्रकृतिक गैस पाइपलाइन के रामनाथपुरम-थूथूकुडी खंड का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘क्या हमें आयात पर इतना निर्भर होना चाहिए? मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता हूं, पर हमने इस विषय पर ध्यान दिया होता, तो हमारे मध्यम वर्ग को बोझ नहीं उठाना पड़ता. स्वच्छ और हरित ऊर्जा के स्रातों की दिशा में काम करना और उ ऊर्जा निर्भरता को कम करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है.’’


निवेश गिनाया.

प्रधानमंत्री आगे कहते हैं कि उनकी सरकार मध्यम वर्ग की कठिनाइयों के प्रति संवेदनशील है. भारत अब किसानों और उपभोक्ताओं की मदद करने के लिए इथेनॉल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. आगे मोदीजी कहते हैं कि सरकार ऊर्जा के अक्षय स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, और 2030 तक देश में 40 प्रतिशत ऊर्जा का उत्पादन होगा. यह कहने में भी वे नहीं चूके कि लगभग 6.52 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया गया है. यह संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है. हमारी कंपनियों ने गुणवत्ता वाले तेल और गैस परिसंपत्तियों के अधिग्रहण में विदेशों में निवेश किया है.

तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

अभी मोदी सरकार ने योजना बनाई है कि तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर पांच वर्षों में 7.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. और देश के 470 जिलों को कवर करते हुए शहर के गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया जाएगा. प्रधानमंत्री उम्मीद जगाते हैं कि सरकार वर्तमान ऊर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की दिशा में काम कर रही है.

यह सब भविष्य के गर्भ में है, पर वर्तमान में जनता जो महंगाई से त्रस्त है, उसके लिए कृ़ित्रम बढ़ाई हुई सारी वस्तुओं की कीमत कम करने की जरूरत है. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो लोग विद्रोह करने से भी नहीं झिझकेंगे. कब तक महंगाई की मार सहन करते रहेंगे?

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