कोरोना के कहर से घबराहट के मारे लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, जानिए कैसे ठीक होगी ये मानसिक बीमारी

0
16
Corona

कोरोना महामारी का कहर लगातर बढ़ता जा रहा है। इस महामारी ने लोगों को अपने घरों में रहने को मजबूर कर दिया है। घर में रहने की वजह अपने आप को इस बीमारी की चपेट में आने से बचाना। जो लोग सावधानी के साथ घर में रह रहे हैं हो सकता है वो इस कोरोना से बच जाएं, लेकिन इस महामारी के डर से कैसे लड़े? दरअसल खबरों के अनुसार कई लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। डिप्रेशन यानि मानसिक बीमारी। ऐसा देखा गया है कि लोगों के सामने कोरोमा का नाम आते ही वो भयभीत हो जाते हैं। अपने भय में ना जाने किटना कुछ सोच लेते हैं। सोच लेते हैं जैसे- अगर मुझे ये कोरोना हो गया तो मैं क्या करुंगा, मुझे कुछ हो गया तो मेरे परिवार का क्या होगा?। कुछ इस तरह के विचारों से घिरे हुए लोग अंत में मानसिक रोगी बन कर रह जाते हैं।

Corona

भारत में कोरोना की दूसरी लहर किसी सुनामी से कम नहीं है, पर फिर भी इस बीमारी से डर कर नहीं बल्कि पूरी सावधानी के साथ निर्डर होकर लड़ना है। आए दिन चैनलों में दिखाई जाने वाली न्यूज रिपोर्ट को भी देख कर लोग घबरा जाते हैं। ऐसे माहौल ने लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी को जन्म दिया है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक महामारी के दौरान मानसिक सेहत को लेकर जो डाटा सामने आ रहे हैं वो डराने वाले हैं। अलग-अलग फील्ड के एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड ने समाज को हमेशा के लिए बदल दिया है। एक तरह से ये एक मेंटल पेंडेमिक भी है।

मैक्स अस्पताल में साइकाइट्री विभाग के प्रमुख डॉ. समीर मल्होत्रा और उनकी टीम ने कुछ दिन पहले देशभर में एक सर्वे किया था जिसमें एक हजार से अधिक भारतीयों ने हिस्सा लिया था। इसमें हिस्सा लेने वाले 55 फीसदी लोगों ने घबराहट और 27 फीसदी लोगों ने डिप्रेशन की बात स्वीकारी थी। डॉ. समीर कहते हैं, ‘ऑक्सीजन की शार्टेज है, अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे हैं, इसे लेकर लोग घबराए हुए हैं। उनके मन में बार-बार सवाल कौंधता रहता है कि यदि हमारे साथ ऐसा कुछ हुआ तो हम क्या करेंगे? डॉ. समीर के मुताबिक सिर्फ वही लोग डिप्रेशन से पीड़ित नहीं हो रहे हैं जो कोरोना से ग्रस्त हुए हैं बल्कि इससे उबर चुके लोग या अपनों को गंवाने वाले भी सदमे और अवसाद का शिकार हो रहे हैं।

महामारी की वजह से अनिश्चितता का माहौल भी है। सरकारें लॉकडाउन लगा रही हैं। लोगों को नहीं पता कि कब तक बाजार खुले रहेंगे और आगे क्या होगा। इसकी वजह से पैनिक भी है।

Corona

सोशल मीडिया पर आने वाले निगेटिव पोस्ट भी लोगों को डिप्रेशन की तरफ ले जा रहे हैं। डॉ. समीर कहते हैं, ‘लोगों को बिस्तर नहीं मिल रहे हैं, वो मारे-मारे फिर रहे हैं। लोग कई वॉट्सऐप ग्रुपों से जुड़े हैं, कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी हैं। वो वहां प्लाज़्मा की जरूरत या बेड की जरूरत आदि के पोस्ट बार-बार देख रहे हैं। ये चीज़ें लोगों को मिल नहीं पा रही हैं तो इससे भी लोग कन्फयूज़्ड स्टेट ऑफ़ माइंड में आ रहे हैं।’

ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने अपने निकटतम परिजनों या संबंधियों को खो दिया है। ऐसे लोगों का जाना जिनसे दो दिन पहले ही उन्होंने बात की थी उससे भी लोगों को धक्का लग रहा है। इस तरह की अचानक डेथ से लोगों में ग्रीफ रिएक्शन क्रिएट हो रहा है। लोगों में बहुत अधिक गुस्सा, बहुत अधिक अधूरापन और बहुत अधिक डिप्रेशन आ रहा है।

वो कहते हैं, ‘क्लिनिकल डिप्रेशन जो एक तरह की बीमारी है उसमें मन लगातार उदास रहने लगता है। यदि आप एक सप्ताह से अधिक समय से उदास हैं, किसी काम में आपका मन नहीं लग रहा है, छोटे-छोटे काम बहुत भारी लगने लगे हैं, बात-बात पर आंखें भर आती हैं, आप घबरा जाते हैं और मन में नकारात्मकता जड़ पकड़ने लगी है। ये ख्याल आने लगे हैं कि मैं अब बेकार हो चला हूं, अब कुछ नहीं होगा। बेबस और असहाय महसूस करते हैं तो ये सब डिप्रेशन के ही संकेत हैं।

डिप्रेशन का इलाज क्या है?

एक्सपर्ट के अनुसार ‘डिप्रेशन से बचने के लिए सबसे पहले लोगों को ज्यादा से ज्यादा सकारात्मक चीजों की ओर ध्यान देना चाहिए और निगेटिव विचारों को छोड़ना चाहिए। नकारात्मक विचार ही डिप्रेशन की वजह होते हैं।

Corona

‘सबसे आसान समाधान यही है कि लोग निगेटिव ना सोचें। जैसे ही लगे कि हम ज्यादा सोच रहे हैं तो सोचना बंद करें और किसी भी काम में अपने आप को व्यस्त रखें। ये सिर्फ मानसिक बीमारी तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि शारीरिक बीमारी में भी बदल जाता है।’ दिल की धड़कन बहुत तेज़ हो जाना, मुंह सूखना, हाथ-पैर में कंपन होना, सांस उखड़-उखड़ कर आना, ये सब एंग्जायटी के लक्षण हैं, यदि सही समय पर इसे ट्रीट नहीं किया गया तो यही डिप्रेशन बन जाता है। जैसे-जैसे हालात ठीक होंगे ये डिप्रेशन भी अपने आप ठीक हो जाएगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here