दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट, हेल्थ मिनिस्टर बोले- यह अच्छी स्थिति नहीं

0
30

देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर कहर बनकर दूट रही है. जहां एक तरफ अस्पतालों में कोविड टेस्ट को लेकर लंबी-लंबी कतारें लग रही है. वहीं ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे अस्पतालों के हालात दर से बदतर होती जा रही है. दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की किल्लत पर दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अलग-अलग अस्पतालों में हालात भिन्न हैं. कहीं 6 घंटे, तो कहीं 8 घंटे तो कहीं 10 घंटे का स्टॉक बचा है. हमें इसे अच्छी स्थिति नहीं कह सकते.

सत्येंद्र जैन ने कहा कि बीते 3 दिनों से दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी है. हालांकि केंद्र सरकार ने 21 अप्रैल (बुधवार) को दिल्ली का कोटा बढ़ाया है. वह सभी राज्यों को ऑक्सीजन आवंटित कर रहे हैं. पहले दिल्ली का कोटा जरूरत से कम था अब ये बढ़ाया गया है. अगर ये क्राइसिस एक 2-3 में खत्म हो जाता है तो बेड बढ़ाए जाएंगे.

इस वक्त आईसीयू बेड्स की कमी है. हमने केंद्र से बेड की मांग की है, हमें उम्मीद है कि केंद्र हमें 700-800 आईसीयू बेड जल्द देगी. हमने केंद्र सरकार से उनके सरकारी अस्पतालों में 7,000 बेड मांगे थे लेकिन करीब 2,000 बेड ही मिले हैं.

दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी

बता दें, इस वक्त दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल और चन्नन देवी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते कई मरीजों की जान खतरे में है. राजीव गांधी अस्पताल में तो सिर्फ 2 घंटे का ऑक्सीजन बचा है. यहां 900 मरीज भर्ती हैं. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यहां रोजाना 5-6 टन ऑक्सीजन की जरूरत होती है. दिल्ली के रोहिणी में मौजूद सरोज अस्पताल में भी ऑक्सीजन का स्टॉक सिर्फ 2 घंटे का बचा है.

वहीं, बीती रात भी ऑक्सीजन की किल्लत लगातार जारी रही और कई अस्पतालों में स्टॉक खत्म हो गया है. इस बीच दिल्ली के नजफगढ़ स्थित राठी अस्पताल ऑक्सीजन खत्म हो गया था जिससे इमरजेंसी के हालात पैदा हो गए थे लेकिन देर रात ऑक्सीजन का स्टॉक यहां पहुंचा.

उधर, इस मामले को लेकर एम्स प्रबंधन का कहना है कि उनके यहां मुख्य अस्पताल परिसर और ट्रामा सेंटर में कोरोना मरीज भर्ती हैं. मुख्य अस्पताल परिसर में 33 ऑक्सीजन बेड हैं जबकि ट्रामा सेंटर में 226 ऑक्सीजन और 71 आईसीयू बेड हैं. बुधवार दोपहर को यह सभी पूरी तरह से भर चुके हैं और अब मरीजों को झज्जर स्थित एम्स के ही कैंसर अस्पताल में भेजा जा रहा है. एम्स प्रबंधन के अनुसार उन्होंने किसी भी अस्पताल के कोटा से ऑक्सीजन नहीं लिया है, उन्होंने आरोप से इंकार करते हुए कहा कि ऑक्सीजन वितरण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पास है. इसमें अस्पताल के स्तर पर कोई दखलअंदाजी नहीं है. ऐसे में एम्स पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here