यहां जानिए देश में क्या है ऑक्सीजन की असली स्थिति ?

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oxygen in the country

देश में कोरोना संकट के बीच वैक्सीन और ऑक्सीजन की कमी हो रही है जो कि एक बड़ी चुनौती है। लगातार ऑक्सीजन की कमीं को दूर करने की कोशिश की जा रही है लेकिन अभी तक पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है। तो जानिए कि अभी ऑक्सीजन सप्लाई की स्थिति क्या है।

 oxygen in the country

तो पिछले साल आई महामारी की पहली लहर के मुकाबले इस बार दूसरी लहर में ऑक्सीजन की मांग में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना की पहली लहर से पहले देश में रोजाना 700 टन ऑक्सीजन का निर्माण होता था लेकिन कोविड के दौरान मांग बढ़ने से उत्पादन बढ़कर 3000 टन हो गया। अब हालात और बदल गए हैं और कोरोना की दूसरी लहर में रोजाना 8500 टन ऑक्सीजन का उत्पादन करना पड़ रहा है।

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बता दें कि ऐसा दुनिया में कभी नहीं हुआ है जिस तरह से भारत में ऑक्सीजन की मांग बढ़ी है। वहीं उत्तर भारत में ऑक्सीजन की मांग ज्यादा है जिसके कारण राज्यों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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देश में जारी ऑक्सीजन की मांग की आपूर्ति को पूरा करने की पर्याप्त क्षमता है और भारतीय सेना भी ऑक्सीजन की सप्लाई के काम में शामिल है। इसके अलावा अस्पतालों में PSA प्लांट बैकअप के तौर पर रखना सही है। अगर लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई में समस्या होती है तो इमरजेंसी में प्लांट का इस्तेमाल किया जा सकता है हालांकि प्लांट्स को लगाना और मेंटनेंस करना इतना आसान नहीं है। यही वजह है कि बड़े-बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन के प्लांट्स नहीं है।

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अब फिलहाल देश में रोजाना 9200 मेट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन हो रहा है और 8500 टन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस हिसाब से देखा जाए तो हमारे पास अतिरिक्त ऑक्सीजन है लेकिन इस बात से भी मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि लॉकडाउन से कोरोना के केसों में कमी आई है।

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