झारखंडः रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी और निशिकांत दुबे ने हिला दी हेमंत सोरेन की कुर्सी! जानिए पूरा मामला

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झारखंड की सियासत के लिए आज (शुक्रवार) का दिन बेहद खास होने वाला है, क्योंकि पत्थर खनन लीज आवंटन मामले में घिरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर राज्यपाल रमेश बैस अहम फैसला सुना सकते है. अगर राज्यपाल अपना फैसला हेमंत सोरेन के खिलाफ सुनाते है, तो उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी जाना तय माना जा रहा है. राज्य के सियासी हलचल को देखते हुए कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपने विधायकों को रांची से बाहर ना जाने की सलाह दी है. बता दें, हेमंत सोरेन पर पत्थर खनन लीज आवंटन मामले में आरोप लगने के बाद राज्यपाल रमेश बैस ने चुनाव आयोग से राय मांगी थी, जिस पर चुनाव आयोग ने अपनी राय राज्यपाल को भेज दी है.

वहीं, चुनाव आयोग की रिपोर्ट राज्यपाल को मिलने के बाद अटकलें तेज हो गई है, अगर राज्यपाल उनकी विधानसभा सदस्यता को रद्द करते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. हालांकि, वो इसके बाद भी शपथ लेकर 6 महीने तक मुख्यमंत्री बने रहते हैं और उन्हें दोबारा विधानसभा चुनाव जीतकर विधानसभा का सदस्य बनना होगा.

वहीं, अगर राज्यपाल विधायकी रद्द करने के साथ-साथ उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाते हैं ऐसी स्थिति में हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना होगा और उन्हें अपनी किसी करीबी को मुख्यमंत्री बनाना होगा. हालांकि इन सभी विकल्पों पर फैसला राज्यपाल रमेश बैस के फैसले के बाद ही होगा.

बता दें, हेमंत सोरेन की कुर्सी हिलाने में सबसे ज्यादा भाजपा के तीन नेताओं का अहम रोल माना जा रहा है. इनमें सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास है, जिन्होंने सबसे पहले फरवरी में मुख्यमंत्री के खिलाफ पत्थर खनन का आरोप लगाते हुए दस्तावेज सार्वजानिक किया था. इसके बाद बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में अहम रोल निभाया और फिर भाजपा प्रतिनिधि के साथ राज्यपाल के पास पहुंचे और उन्होंने मामले में कार्रवाई के लिए दस्तावेज सौंपे. गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे लगातार झारखंड सरकार के खिलाफ हमलावर रहे हैं, उन्होंने इस मामले को केंद्र तक पहुंचाया. इन नेताओं की वजह से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरने की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है.

गौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा की 81 सीटें हैं यहां बहुमत के लिए 42 सीटें हैं. राज्य की सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा है उसके पास 30 विधायक हैं. वहीं, कांग्रेस के 18, राजद और माले के 1-1 विधायकों के समर्थन से हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री हैं. विपक्ष में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है उसके 26 विधायक हैं. इसके अलावा 2 आजसू, 1 एनसीपी और 2 निर्दलीय विधायकों का समर्थन है. लिहाजा, भाजपा की नजर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के असंतुष्ट विधायकों पर है. सूत्रों की मानें तो दोनों पार्टी के करीब 13 विधायक नाराज बताए जा रहे हैं. ऐसे में भाजपा अगर इन विधायकों को अपने पाले में ला सकती है तो राज्य में बड़ा गेम हो सकता है.

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