भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने रचा इतिहास, इंडोनेशिया को हराकर अपने नाम किया थॉमस कप!

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Men's badminton team ने रविवार को फाइनल में 14 बार के चैंपियन और धारक इंडोनेशिया को हराकर थॉमस कप (Thomas Cup) में पहला स्वर्ण पदक जीता है. जो की भारतीय खेलों के लिए सबसे यादगार पलों में से एक हैं. बता दें की पहली बार फाइनल में पहुंचे भारत ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए इंडोनेशिया को 3-0 से पीछे छोड़ इतिहास रचा है. यह सारा खेल महज 20 वर्षीय लक्ष्य सेन ने टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता एंथनी गिंटिंग को हराकर शुरू किया.

डबल्स स्टार Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty ने तब Mohammad Ahsan और kewin sanjay sukamuljo को 18-21, 23-21, 21-19 से हराकर भारत को 2-0 की बढ़त दिलाई. और अंत में, किदांबी श्रीकांत ने जोनाथन क्रिस्टी को 21-15, 23-21 से हराकर भारत की ऐतिहासिक जीत पर मुहर लगा दी. जानकारी के लिए बता दें की यह पहली बार था जब भारत थॉमस कप के फाइनल में पहुंचा था, लेकिन पूरे फाइनल में स्टील का उत्साह दिखाया.

लक्ष्य सेन और रंकीरेड्डी-शेट्टी की युगल जोड़ी दोनों ने अपने-अपने शुरुआती गेम हारने के बाद वापसी की. दरअसल, गिनटिंग के खिलाफ शुरुआती गेम में सेन को 8-21 से शिकस्त मिली थी. लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए दूसरा गेम 21-17 से जीत लिया. भारतीय ने फिर तीसरे में जुलूस निकाला, सभी को बिल्ली जैसी सजगता और जिद्दी रक्षा के साथ 21-16 से गेम जीतने के लिए उकसाया. रंकीरेड्डी और शेट्टी के पास अहसान और सुकामुल्जो के खिलाफ जाने का अविश्वसनीय काम था. इंडोनेशिया की जोड़ी ने शुरुआती गेम में 21-18 से जीत हासिल की. उसके बाद दूसरे गेम में उन्हें बड़ी बढ़त मिली लेकिन रैंकीरेड्डी-शेट्टी ने चार मैच अंक बचाकर दूसरा गेम 23-21 से जीत लिया.

दोनों टीमों को अलग करने के लिए निर्णायक एक गर्मागर्म मुकाबला था, लेकिन अंत में, भारतीयों ने टीम को 2-0 की बढ़त दिलाने के लिए अपनी नसों को बनाए रखा. फिर आई श्रीकांत की बारी, पूरे टूर्नामेंट में शटलर टॉप फॉर्म में थे और एक बार फिर पार्टी में आए. उन्होंने क्रिस्टी के खिलाफ पहला गेम खत्म करने में सिर्फ 19 मिनट का समय लिया. श्रीकांत दूसरे गेम में किनारे कर रहे थे, मिड-ब्रेक अंतराल पर 11-8 से आगे चल रहे थे. हालांकि, 16-13 की बढ़त बनाने के लिए जोरदार वापसी की, लेकिन श्रीकांत दूर रहे और हार मानने से इनकार कर दिया. श्रीकांत ने खेल और मैच को बंद करने से पहले भारत को एक यादगार जीत दिलाने से पहले 20-21 पर एक गेम प्वाइंट बचा लिया.

अगर बात थॉमस कप के बारें में करो तो थॉमस कप प्रतियोगिता को आयोजित करने का विचार सर जॉर्ज एलन थॉमस का था, जो 1900 के दशक की शुरुआत में एक बेहद सफल अंग्रेज बैडमिंटन खिलाड़ी थे. जॉर्ज थॉमस फुटबॉल विश्व कप एवं डेविस कप की तर्ज पर इस पुरुष टूर्नामेंट का आयोजन करना चाहते थे. जॉर्ज एलन थॉमस की मेहनत रंग लाई और पहली बार 1948-49 में इंग्लिश जमीं पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. थॉमस कप को पहले तीन साल पर आयोजित किया जाता था, लेकिन 1982 में हुए फॉर्मेट में बदलाव के बाद यह दो साल पर आयोजित किया जाने लगा है. थॉमस कप को पुरुषों का विश्व टीम चैम्पियनशिप भी कहा जाता है. बैडमिंटन की शासी निकाय 'बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) के सदस्य देश इसमें भाग लेते हैं.

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