बिहार सरकार की जुमलेबाजी से कैसे हारेगा कोरोना ?

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बिहार में कोरोना की रफ्तार बढ़ रही है लेकिन उससे लड़ने के लिए तैयारी सिर्फ नाम बराबर है। परेशानी का सबब इसलिए है क्योंकि 12 करोड़ की आबादी वाले बिहार में जहां मार्च के महीने तक एक हजार से भी कम एक्टिव केस थे वहां अप्रैल के 14 दिनों में ही 29 हजार हो चुके हैं। बात इससे निपटने की तैयारी की आती है तो वो हवा-हवाई है। देखा जाए तो चुनाव में जोर लेकिन इलाज करने में कमजोर। सरकार ने फ्री वैक्सीन का चुनावी वादा तो किया लेकिन जरूरत के वक्त अस्पताल में बेड भी नसीब नहीं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 14 अप्रैल 2021 तक कोरोना से 1675 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 1 अप्रैल 2021 तक सिर्फ 1907 एक्टिव केस थे जबकि 14 अप्रैल तक संख्या बढ़कर 29078 हो गई। साफ है कि 10 गुना से भी ज्यादा केस सिर्फ 14 दिनों में बढ़े हैं।

महामारी के आतंक के बीच राजधानी पटना के सरकारी अस्पतालों का हाल ये है कि कोरोना के मरीजों के लिए बेड तक नहीं है। बिहार में सबसे ज्यादा मामले पटना में ही आ रहे हैं और पटना में पिछले एक हफ्ते में औसतन हर दिन एक हजार से ज्यादा पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं। अकेले पटना में ही साढे़ सात हजार से ज्यादा एक्टिव केस हैं। जिसके बाद पटना के अस्पतालों में सिर्फ 1100 बेड हैं, जिसमें करीब 850 बेड फुल हैं और सरकारी अस्पतालों के सभी बेड भरे हुए हैं।

बिहार के सबसे बड़े अस्पताल PMCH की बात करें तो पीएमसीएच में 100 कोरोना डेडिकेटेड बेड हैं और सभी फुल हैं। इसके अलावा करीब 20 बेड हेल्थ वर्कर और डॉक्टरों के लिए आरक्षित हैं। पटना AIIMS में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं जहां मरीजों के लिए 115 में से एक भी बेड खाली नहीं हैं। बिहार सरकार के पास इसके लिए कोई नीति नहीं है।

ऐसे में बात की जाए कोरोना की वैक्सीन की तो नीतीश सरकार यहां भी बैकफुट पर ही है। चूंकि नीतीश कुमार में 11 से 14 अप्रैल तक चलने वाले टीका-उत्सव के लिए हर दिन 4 लाख लोगो को टीका लगाने का लक्ष्य रखा था जबकि में 14 अप्रैल को सिर्फ 1 लाख 32 हजार लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई। 16 लाख लोगों को वैक्सीन लगाने का टार्गेट था लेकिन वो पूरा नहीं हो सका और 4 दिन में सिर्फ 5 लाख 44 हजार लोगों को ही वैक्सीन लग सकी। 12 करोड़ की आबादी वाले बिहार में 14 अप्रैल 2021 तक 54 लाख से ज्यादा लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई है यानि अबतक 5 फीसदी से भी कम लोगों को कोरोना का टीका लगा है। ऐसे में बिहार के सीएम या कुशासन बाबू से सवाल लाजिमी है कि अगर चुनाव का खुमार उतर गया तो बीमार बिहार का इलाज भी कराइये।

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