दिल्ली साफ कैसे हो? जब एमसीडी ढ़ीली हो!

0
45

भगवती प्रसाद डोभाल (संपादकीय)

पहले प्रश्न उठता है कि दिल्ली को साफ ररखने की जिम्मेदारी किसकी है? उत्तर इसका साफ है कि नगर निगम के पास शहर की स्वच्छता की जिम्मेदारी है. लेकिन नगर का सर्वेक्षण करने के बाद ऐसा नहीं दिखता कि नगरनिगम कोई विशेष प्रयास कर रहे हों, देश की राजधानी दिल्ली को साफ रखने का. इसका जीता जागता उदाहरण अभी पता चला है कि सफाई कर्मचारियों की दिल्ली में कमी है, पर उसके लिए दिल्ली को स्वच्छ बनाने के लिए तीन नगर निगम सुस्त पड़े हैं. पहले एक ही नगर निगम हुआ करता था. अब तीन निगम बनाए गए हैं, पर स्थिति में सुधार की बजाय गंदगी के ढ़ेर दिखते हैं.


गंदगी तो फैलेगी!

हाल ही में आम आदमी के प्रवक्ता से ज्ञात हुआ है कि तीनों नगर निगम में सफाई कर्मचारियों में बहुत असंतोष फैला हुआ है और यह स्थिति किसी दिन कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से भयंकर हो सकती है. संभावनाएं ऐसी लग रही हैं. इसका विशेष कारण है कि जिन कर्मचारियों की अस्थाई नियुक्त बहुत दिनों से निगम में चल रही है, उनको स्थाई नहीं किया गया है. साथ ही उन्हें स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं दी गई है, जबकि वे गंदगी ढ़ोने और रातदिन उसके बीच हैं, उन्हें सबसे पहले स्वास्थ्य की सुविधा देने की जरूरत है. यह बहुत बड़े असंतोष का कारण सफाई कर्मचारियों में दिख रहा है. यदि जो सफाई कर्मचारी वर्तमान में काम कर रहें हैं, वे काम पर न आएं तो इसके लिए जिम्मेदार वे ही संस्थाएं हैं, जिनके मातहत उन्हें सुविधाएं मिलनी चाहिए. इसके अलावा एक और बात का पता चला है कि जो कर्मचारी सेवानिवृत हुए हैं, उन्हें सेवानिवृति के लाभ पीएफ के साथ नहीं दिए गए. यह लोग 2 वर्षों से अपने रिटायरमेंट की आर्थिक सुविधाओं के लिए अभी तक इंतजार कर रहे हैं.

प्रवक्ता ने एक और बात का भी जिक्र किया है कि कर्मचारी पिछले कुछ महीनों से प्रोटेस्ट कर रहे हैं, पर एमसीडी सोई पड़ी है. 2018 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सफाई कर्मचारियों की मांगों को माना था, उसके अनुसार जो कर्मचारी 1998 से 2003 तक काम पर रखे गए थे, उन्हें नियमित करने का आश्वासन दिया था. उनका दिया हुआ यह आश्वासन भी अभी तक धरा का धरा है. इस बात का भी आश्वासन था कि जिन कर्मचारियों को 2003 के बाद सहानुभूति के आधार पर नियुक्त किया गया था, उन्हें भी रेगुलर कर दिया जाएगा.


20 वर्षों से एक भी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं!

आश्चर्य हैं कि दिल्ली, जिसकी जनसंख्यां लगभग 2 करोड़ है. उनकी सफाई के लिए 15-20 वर्षों से कोई नया कर्मचारी सफाई आदि के लिए नहीं रखा गया. ऐसे में गंदगी का ढ़ेर सड़कों, गली-मुहल्लों में पड़ा रहे, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं. यह बात भी सामने आई है कि हर चुनाव के दौरान कर्मचारियों को उनकी दशा सुधारने का आश्वासन दिया जाता है, पर चुनाव होने के बाद सारी की सारी स्थिति जस की तस हो जाती है. कर्मचारी जैसे ही हड़ताल पर जाते हैं, तो उन्हें शांत करने के लिए फिर आश्वासनों की झड़ी लग जाती है. यह भी देखने में आया कि जो कर्मचारी एमसीडी के कामों के लिए रखे गए हैं, उनका उपयोग सिर्फ चुने हुए एमसीडी के प्रतिनिधि अपने निजी काम के लिए घरों में रख कर करते हैं.


सुस्त प्रक्रिया

लेकिन इस बात का खंडन बीजेपी के प्रवक्ता करते हैं कि आप पार्टी सही नहीं बता रही है, हमने तो उत्तरी एमसीडी में मार्च 1998 तक के अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई कर दिया है और आगे जो 2003 तक के कार्यरत सफाई कर्मचारी हैं, उन्हें भी स्थाई करने का विचार है.

सोचिए, जब इस तरह का व्यवहार कर्मचारियों के भविष्य का हो रहा हो, तो निश्चित ही दिल्ली मेरी दिल्ली की सफाई की स्थिति चिंता जक है. यह तो आप आए दिन देखते हैं, यदि थोड़ा भी पानी बरसता है, तो दिल्ली की स्थिति चिंताजनक हो जाती है. ऐसे में सबसे बड़ी जिम्मेदारी एमसीडी में चुने हुए प्रतिनिधियों की है. यदि वे दिल्ली को साफ रखने में अपना हाथ नहीं बढ़ाते, तो उन्हें स्वयं ही अपना इस्तीफा देना चाहिए, ताकि ऐसा कोई प्रतिनिधि आए, जो सफाई और सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण कर सके. जब देखो, तब दिल्ली की सड़कें गड्ढ़ों से भरी पड़ी होती है. कोई रखरखाव का जिम्मेदार नहीं है. इस बात की ओर दो इंजनवाली सरकार को जिम्मेदारी के साथ दिल्ली के सौंदर्य को निखारने का काम करने की जरुरत है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here