कर्नाटक बंद पर PFI को हाईकोर्ट से फटकार, कहा-हिंसा बर्दाश्त नहीं, कड़ी कार्रवाई का दिया निर्देश

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कर्नाटक में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) पर प्रतिबंध की तलवार लटक रही है. राज्य के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा है कि केंद्र सरकार ने PFI और SDPI पर पाबंदी लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ज्ञानेंद्र ने कहा कि इन दोनों कट्टरपंथी संगठनों को अनेक आतंकवादी संगठनों का समर्थन प्राप्त है और इनकी योजना अराजकता फैलाने की है. उन्होंने कहा, ‘PFI-SDPI की समाप्ति में लोगों को सहयोग करना चाहिए. इन संगठनों को जाति, धर्म, लाभ-हानि की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए. कांग्रेस के समर्थन से इन संगठनों को फलने-फूलने का मौका मिला.’

PFI और SDPI के कार्यालयों पर NIA की छापेमारी के बाद कर्नाटक में 14 लोगों को राजद्रोह के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि ये गिरफ्तारियां गुरुवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों से की गईं. बेंगलुरु शहर पुलिस ने एक बयान में बताया कि इन 14 लोगों के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने संबंधी धारा समेत IPC की विभिन्न धाराओं के तहत कडुगोंडानाहल्ली पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया. इनमें से दो आरोपी बेंगलुरु और शेष 12 आरोपी राज्य के विभिन्न हिस्सों के हैं. आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा.

वहीं, केरल हाई कोर्ट ने PFI की हड़ताल और राज्य में आज (शुक्रवार) हुई हिंसा की घटनाओं पर संज्ञान लिया है. हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए हड़ताल पर प्रतिबंध लगा दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी इस तरह से बंद नहीं बुला सकता है. कोर्ट ने राज्य प्रशासन से हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने वाले अदालत के आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने सरकार से किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए हर संभव उपाए करने को कहा.

वहीं, PFI की ओर से शुक्रवार को सुबह से शाम तक बुलाई गई हड़ताल हिंसक हो उठी है. केरल के विभन्नि स्थानों पर हड़ताल समर्थकों ने राज्य पथ परिवहन निगम (KSRTC) की बसों पर पथराव किया, जिससे यातायात बाधित हुआ. इससे सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है. आंदोलनकारियों ने मलप्पुरम, पलक्कड़, कोझिकोड, कन्नूर, पेरुंबवूर, पंडालम, पठानमथट्टिा, कट्टकाडा और तिरुवनंतपुरम सहित कई जगहों पर केएसआरटीसी की कई सरकारी बसों पर पथराव किया.

पुलिस सुरक्षा के अभाव में मलप्पुरम, कोझिकोड, एर्नाकुलम और कई अन्य जिलों में निजी बसों ने सेवाएं बंद कर दीं. कुछ जगहों पर हालांकि, निजी कारें, जीप और ऑटोरक्शिा चले. मलप्पुरम, पलक्कड़, एर्नाकुलम, कन्नूर और कोझिकोड सहित कई जिलों में हिंसा की आशंका से कई दुकानें और अन्य निजी संस्थान बंद रहे.

गौरतलब है कि NIA की ओर से गुरुवार को राज्य और देश भर में PFI नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में PFI ने केरल में शुक्रवार को हड़ताल बुलाई. PFI के राज्य मीडिया समन्वयक ए अब्दुल सत्तार ने कहा, ‘गिरफ्तारी आरएसएस नियंत्रित फासीवादी केंद्र सरकार के एक छिपे हुए एजेंडे का हस्सिा है. केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जाता है. सभी लोकतांत्रिक विश्वासियों को संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों को कुचलने वाले फासीवादी शासन के खिलाफ हड़ताल का समर्थन करने के लिए आगे आना चाहिए.’

इस बीच, केरल के पुलिस प्रमुख अनिल कांत ने सभी पुलिस अधिकारियों को हड़ताल से जुड़ी हिंसा को समाप्त करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों, बैंकों, अन्य संस्थानों और केएसआरटीसी बसों के संचालन के लिए पुलिस सुरक्षा सुनश्चिति की जा रही है. उन्होंने हिंसा में शामिल लोगों और सार्वजनिक संपत्तियों को नष्ट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी निर्दश दिया.

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