सुप्रीम कोर्ट में चुनावों में मुफ्त योजनाओं पर 17 अगस्त को सुनवाई

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चुनाव में मुफ्त योजनाओं का वादा करने वाली सियासी दलों मान्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एन.वी. रमना की बेंच में सुनवाई जारी है. सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाया. कोर्ट ने कहा है कि आपने हलफनामा कब दाखिल किया? रात में हमें तो मिला ही नहीं, सुबह अखबार देखकर पता चला. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि यह गंभीर मसला है, मगर कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. लुभावने चुनावी वादे और सोशल वेलफेयर स्कीम में फर्क होता है.

चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा है कि फ्री का सामान या फिर अवैध रूप से फ्री का सामान की कोई तय परिभाषा या पहचान नहीं है. आयोग ने 12 पन्नों के अपने हलफनामे में कहा है कि देश में समय और स्थिति के अनुसार फ्री सामानों की परिभाषा बदल जाती है. ऐसे में विशेषज्ञ पैनल से हमें बाहर रखा जाए. हम एक संवैधानिक संस्था हैं और पैनल में हमारे रहने से फैसले को लेकर दबाव बनेगा.

4 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आयोग ने इस मसले पर पहले कदम उठाए होते तो आज ऐसी नौबत नहीं आती. कोर्ट ने आगे कहा- शायद ही कोई पार्टी मुफ्त की योजनाओं के चुनावी हथकंडे छोड़ना चाहती है. इस मुद्दे को हल करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी बनाने की जरूरत है, क्योंकि कोई भी दल इस पर बहस नहीं करना चाहेगा.

भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की है. इसमें मांग की है कि चुनाव में उपहार और सुविधाएं मुफ्त बांटने का वादा करने वाले दलों की मान्यता रद्द की जाए. अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी.


चुनावों में सियासी दल ऐसे कर रहे मुफ्त योजनाओं का वादा

1. पंजाब विधानसभा चुनाव में आप ने 18 साल से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को 1,000 रुपए महीना देने का वादा किया.

2. शिअद ने हर महिला को 2,000 रुपए देने का वादा किया.

3. कांग्रेस ने घरेलू महिलाओं को 2000 रुपए माह देने का वादा किया.

4. यूपी में कांग्रेस का 12वीं की छात्रा को स्मार्टफोन देने का वादा.

5. यूपी में भाजपा ने 2 करोड़ टैबलेट देने का वादा किया था.

6. गुजरात में आप ने बेरोजगारों को 3000 रुपए महीना भत्ता देने का वादा किया. हर परिवार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली का भी वादा.

7. बिहार में भाजपा ने मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने का वादा किया.

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