पाकिस्तान का सता रहा भारत के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का डर!, जानिए वजह

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अमेरिकी सैनिकों द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में किए गए सफल ऑपरेशन में अल-कायदा चीफ अयमान-अल-जवाहिरी की ड्रोन हमले में मौत हो चुकी है. अल-जवाहिरी की मौत के बाद से पाकिस्तान में दशहत का माहौल रहा है. दरअसल, पाकिस्तान को डर है कि कही उसके देश पर भी इसी तरह का हमला ना कर दिया जाए. क्योंकि अमेरिका ने अपने पुराने दुश्मन अल-जवाहिरी को मौत के घाट उतार दिया है. चूंकि पाकिस्तान आतंकियों का सरपरस्त बनता है, लिहाजा उसे अमेरिका की तरह भारत की ओर से ऐसी कार्रवाई का डर सता रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय सरकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों की मदद से देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का हवाला देने में जुटी हुई है, उसे इस बात का डर है कि भारत भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए फिर सर्जिकल या एयर स्ट्राइक जैसे प्रयास कर सकता है.

बता दें, 1 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस बात खुलासा किया था कि अमेरिकी ड्रोन हमले में अल-जवाहिरी को 31 जुलाई को मार डाला गया. अल-जवाहिरी दुनिया के सबसे वांटेड आतंकवादियों में से एक था. वह 11 सितंबर, 2001 के हमलों का मास्टरमाइंड भी था.

खबरों की मानें तो 4 अगस्त को एक साप्ताहिक समाचार ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार से अल-कायदा प्रमुख को लेकर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि क्या जवाहिरी को बाहर निकालने के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र और खुफिया एजेंसियों की भी मदद ली गई, तो उन्होंने इससे इनकार किया. असीम इफ्तिखार ने कहा, ‘इस कार्रवाई का कोई सबूत नहीं है कि पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग किया गया है.’

इसके अलावा उनसे एक दूसरा सवाल पूछा गया कि क्या पाकिस्तान ऐसे आतंकवाद विरोधी अभियानों का समर्थन करता है. प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगिक प्रस्तावों के अनुसार आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए खड़ा है. उन्होंने पाकिस्तान के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, ‘इन प्रस्तावों के तहत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय दायित्व हैं. अल-कायदा के बारे में मुझे लगता है कि यह स्पष्ट है कि यह एक आतंकवादी इकाई है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की लिस्ट में भी शामिल है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद राज्यों द्वारा निर्धारित कार्रवाई करने के लिए बाध्य हैं.’

प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ अतीत में दृढ़ कार्रवाई की है. आतंकवाद से लड़ने में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों का समर्थन किया है. आप यह भी जानते हैं कि अल-कायदा के खिलाफ कुछ उल्लेखनीय सफलता पाकिस्तान की भूमिका और योगदान के कारण ही संभव हुई थी.’

पाकिस्तान द्वारा सावधानीपूर्वक की गई टिप्पणी से पता चलता है कि आतंकवाद का मुकाबला करने के बहाने देश अन्य देशों की संप्रभुता का उल्लंघन करने के लिए बड़ी शक्तियों को हतोत्साहित कर रहा है. इस तरह के दृष्टिकोण का पाकिस्तान का विरोध उसके डर से उपजा है कि अन्य क्षेत्रीय देश विशेष रूप से भारत क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन करने के लिए उसी बहाने का उपयोग कर सकते हैं.

पाकिस्तान ने मई 2011 में एबटाबाद में ओसामा-बिन-लादेन को मारने के लिए अमेरिकी गुप्त छापे का कड़ा विरोध किया था. अल-जवाहिरी की हत्या के बाद से पाकिस्तान द्वारा निभाई गई भूमिका या अमेरिका ने उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया या नहीं, इस बारे में सवाल पूछे जा रहे थे. यहां तक कि अमेरिकी अधिकारी भी अल-कायदा प्रमुख को मारने के लिए इस्तेमाल किए गए हवाई क्षेत्र का सटीक खुलासा नहीं कर रहे थे. ऐसा कहा जा रहा है कि स्ट्राइक से ठीक 48 घंटे पहले एक वरिष्ठ अमेरिकी जनरल ने सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से बात की थी.

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