दिल्लीः किसान आंदोलन पार्ट-2 की आहट! दिल्ली के नाकों में मुस्तैद पुलिस, हिरासत में राकेश टिकैत

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर किसानों की महापंचायत को देखते हुए सिंघू और गाजीपुर बॉर्डर पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है. दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर बैरीकेडिंग कर दी गई है. अब सभी के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है कि क्या एक बार फिर दिल्ली में किसान आंदोलन होने वाला है. जब केंद्र सरकार और किसानों के बीच विवादित तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने और अन्य मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी तो फिर सोमवार को किसान आखिर क्यों प्रदर्शन करना चाहते हैं. आखिर उनकी क्या मांगे हैं जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है. वहीं. केंद्र का कहना है कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार कभी भी पीछे नहीं हटेगी.

दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल किसान संगठनों का कहना है कि वादा करने के बाद भी किसानों की मांगें अभी तक नहीं मानी गई हैं. किसान संगठनों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) गारंटी कानून बने. लखीमपुर खीरी कांड के पीड़ित किसान परिवारों को इंसाफ मिले. लखीमपुरी खीरी मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को गिरफ्तार किया जाए. किसानों का कहना है कि किसान आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमें वापस लिए जाएं. किसानों के बिजली बिल को लेकर 2022 के नियम रद्द किए जाएं. गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के बकाया मुआवजे का भुगतान तुरंत किया जाए. सभी किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए. किसान संगठनों ने यह भी कहा है कि सेना में अग्निपथ भर्ती योजना को केंद्र सरकार वापस ले.

इधर, किसान नेता राकेश टिकैत को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वो जंतर-मंतर में मौजूद किसानों से मिलने जा रहे थे. तभी दिल्ली पुलिस ने उनको हिरासत में लिया है. राकेश टिकैत ने ट्वीट कर दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है, उन्होंने ट्वीट किया, ‘सरकार के इशारे पर काम कर रही दिल्ली पुलिस किसानों की आवाज को नहीं दबा सकती. यह गिरफ्तारी एक नई क्रांति लेकर आएगी. यह संघर्ष अंतिम सांस तक जारी रहेगा. ना रुकेंगे…ना थकेंगे…ना झुकेंगे.

बता दें, किसानों के भारी विरोध प्रदर्शन और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ 11 दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर 2021 को गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व पर तीनों विवादित कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की थी. 29 नवंबर को नए कृषि बिल को लोकसभा और राज्यसभा से पास करवाकर वापस ले लिया गया. इस तरह से केंद्र सरकार ने किसानों पहली मांग को पूरा कर अपना वादा निभाया. किसानों की पहली मांग यही थी कि नए कृषि कानून वापस लिए जाएं.


इन मुद्दों पर किसानों और सरकार के बीच बनी थी सहमति

MSP पर कमेटी बनाने पर सहमित

केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत में यह तय किया गया था कि केंद्र सरकार MSP पर एक कमेटी बनाएगी. इसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. जिन फसलों पर MSP मिल रही है वह आगे भी जारी रहेगी.


केस वापस

सरकार और किसानों के बीच सहमति बनी थी कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमें वापस लिए जाएंगे. हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब सरकार और रेलवे की तरफ से दर्ज किए सभी मुकदमें वापस लिए जाएंगे.


मुआवजा

किसान संगठनों की तरफ से दावा किया गया कि आंदोलन में 700 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौतें हुई हैं. यूपी, हरियाणा और पंजाब सरकारें पीड़ित किसानों के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देगी.


बिजली बिल

बिजली संसोधन बिल को केंद्र सरकार सीधे संसद में नहीं लाएगी. किसानों और संबंधित पक्षों से पहले चर्चा होगी और आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा.


प्रदूषण कानून

किसानों की मांग थी कि सरकार प्रदूषण कानून वापस लेगी. इस कानून के तहत पराली जलाने वाले किसानों या प्रदूषण करने वाले किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा.

बता दें, एक तरफ किसान संगठनों का दावा है कि सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर रही है तो सरकार का कहना है कि किसानों की कई मांगें मान ली गई हैं तो कुछ अन्य मांगे पूरी होने की प्रक्रिया में हैं.

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