दिल्लीः स्वर्गीय कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा का नेशनल हेराल्ड केस में वित्तीय लेन-देन का नहीं मिला सबूत

0
53

नेशनल हेराल्ड केस में स्वर्गीय कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा का वित्तीय लेन-देन का सूबत नहीं मिला है. यह दावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के करीबी सूत्र ने किया है. सूत्र की मानें, तो अब तक पूछताछ के लिए बुलाए गए कांग्रेस नेताओं (सोनिया गांधी और राहुल गांधी) में से किसी ने भी यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, जिससे एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) और यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (YIL) से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन स्वर्गीय कांग्रेस मोती लाल वोरा द्वारा नियंत्रित किए गए हो.

बता दें, मोतीलाल वोरा कांग्रेस पार्टी के सबसे लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे और उनका निधन 21 दिसंबर 2020 हो गया था. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED से पूछताछ के दौरान कहा था कि AJL और यंग इंडिया लिमिटेड से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन मोतीलाल वोरा ही देखा करते थे.

ED सूत्रों का कहना है कि जब राहुल गांधी से वित्तीय पहलुओं के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी लेन-देन मोतीलाल वोरा द्वारा किए जाते हैं. ED के सामने राहुल और सोनिया के अलावा कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और पवन कुमार बंसल ने भी यही नाम लिया था. लेकिन, ये सभी नेता बैठक से संबंधित दस्तावेज पेश करने में विफल रहे, अगर ऐसी कोई बैठक हुई.

ED के सूत्रों ने यह भी कहा कि ED के पास खड़गे को बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था जब संसद सत्र चल रहा था क्योंकि वह यंग इंडिया के एकमात्र कर्मचारी हैं.

बता दें, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दिल्ली में कांग्रेस के स्वामित्व वाले अखबार नेशनल हेराल्ड के परिसर में स्थित यंग इंडिया के कार्यालय को अस्थाई रूप से सील कर दिया है.

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में एक निचली अदालत के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी. जिसमें आरोप लगाया गया था कि यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण में कुछ कांग्रेस नेता धोखाधड़ी में शामिल थे.

बता दें, नेशनल हेराल्ड 1938 में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित एक समाचार पत्र था. अखबार एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) द्वारा प्रकाशित किया गया था. 2008 में, AJL 90 करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज के साथ बंद हो गई. सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि YIL ने 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए ‘दुर्भावनापूर्ण’ तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को ‘अधिग्रहित’ किया.

मोतीलाल वोरा तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष थे और AJL मामलों में सक्रिय रूप से शामिल थे, उन्होंने जनवरी 2008 में AJL ग्रुप के नेशनल हेराल्ड अखबार को बंद करने की घोषणा करने वाले समझौते पर भी सह-हस्ताक्षर किए थे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here