रक्षा क्षेत्र में चीन दुनिया से आगे!

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भगवती प्रसाद डोभाल (संपादकीय)

चीन ने हाल ही में अंतरिक्ष में रणकौशल की क्षमता हासिल करने में सबको चकित कर दिया है. इस क्रम में चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइल के परीक्षण में सफलता प्राप्त कर ली है. अमेरिका ही नहीं, इससे और परमाणु संपन्न देशों को एक जर्बदस्त झटका चीन दे के चला गया है. युद्ध क्षेत्र में आधुनिक हथियारों की दौड़ में अमेरिका, रूस और अन्य देश चीन ने पीछे छोड़ दिए हैं. यही नहीं भारत चीन का एकदम पड़ोसी देश है. चीन की प्रकृति है कि देर-सबेर भारत को वह टेढ़ी नजरों से देखता आया है. भारतीय भूमि को हथियाने की उसकी बहुत ललक है. भारत ही नहीं, वह हमेशा जापान का प्रतिद्वंदी रहा है. अपने पड़ोसियों पर दादागिरी करने में माहिर चीन अपने पास दुनिया के उत्कृष्ठ औजारों को बनाने और इकठ्ठा करने की कोशिश में लगा है.

जमीन हथियाने में माहिर

भारत का कभी पड़ोसी देश, जो बफर राष्ट्र तिब्बत था, उसको चीन हथिया कर ले गया और वहां के धर्म गुरु दलाई लामा को मजबूरन भारत में शरण लेनी पड़ी. यही नहीं बार-बार अपनी आंखें तरेर कर चीन अरुणाचल को हमसे छीनने की कोशिश में लगा रहता है. इसी परिप्रेक्ष्य में 1962 का युद्ध चीन ने हम पर थोपा, जिसके लिए भारत तैयार नहीं था. और न ही हम चीन से उम्मीद कर रहे थे कि चीन भारत की भूमि पर कब्जा करने के लिए बेताब है. चीन की यह विस्तारवादी नीति न जाने कब युद्ध में भारत को कुदवा दे. वह मौके की तलाश में है. इसीलिए विश्व पर एकछत्र व्यापार ही नहीं, भूमि कब्जाने की नीति स्पष्ट दिख रही है. इसी प्रसंग में हाइपरसोनिक मिसाइल का जिक्र करना आवश्यक हो जाता है.

हापरसोनिक मिसाइल क्या है?

यह मिसाइल अंतिरिक्ष में छोड़ने पर पृथ्वी के करीब से चक्कर काटती हुई निकलती है, इससे वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए पृथ्वी के किसी भी हिस्से पर परमाणु अस्त्र दाग सकती है. यह रिपोर्ट फाइनेसियल टाइम्स ने प्रकाशित की है. आगे जिक्र किया गया है कि हापरसोनिक ग्लाइड प्रक्षेपास्त्र को लंबी दूरी के राकेट से दागा जाता है. चीन ने अगस्त में इसका परीक्षण किया था, पर इसको गुप्त ही रखा. पर अमेरिका की इंटेलिजेंस ने इस परीक्षण को पकड़ ही लिया. इस बाबत पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किरबाय का कहना है कि हम इस पर विशिष्ट टिप्पणी नहीं करेंगे, पर इतना कहना चाहेंगे कि चीन सुरक्षा औजारों को बहुत तेजी से समेटने में व्यस्त है. ताकि अपनी सैनिक क्षमता को विश्व को दिखा सके. इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का उसका लक्ष्य स्पष्ट है. इसी कारण चीन हमारे लिए एक चुनौती के रूप में खड़ा है.

कौन देश काम कर रहे हैं हाइपरसोनिक पर

चीन के अलावा, अमेरिका, रूस और कम से कम पांच और देश हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीकी पर काम कर रहे हैं. जैसे पारंपरिक ब्लास्टिक मिसाइल, जो परमाणु अस्त्रों को गिरा सकती है, इसकी गति ध्वनि की गति से पांच गुणा ज्यादा है, लेकिन ब्लास्टिक मिसाइल अतंरिक्ष में ऊंची उड़ान भरकर ही, फिर अपने लक्ष्य को भेदती है. लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइल वातावरण के नीचे तक उड़ान भर सकती है, इस कारण वह अपने लक्ष्य को भेदने में बहुत कम समय लेती है. इसकी खूबी है कि वह अपने को सुरक्षित रखते हुए काम को अंजाम देने में तेज है.

हाइपरसोनिक का अभी तोड़ नहीं!

दूसरी तरफ अमेरिका ने एक ऐसा सिस्टम विकसित किया हुआ है, जिसमें क्रूज और ब्लास्टिक मिसाइलों से अपनी सुरक्षा की जा सकती है. लेकिन हापरसोनिक मिसाइल को ट्रैक करना और उससे अपनी रक्षा करना अभी मुश्किल है.

हथियारों की इस दौड़ में चीन ठीक हमारे सर पर बैठा है, उसकी टक्कर लेने के लिए भारत को भी उससे आगे निकलने की आवश्यकता है. क्षेत्र का शक्ति संतुलन बनाना है, तो यह सब तकनीकी हमें भी लेनी पड़ेगी. किसी के भरोसे रहना और उसका पिछलग्गू होन की बजाय अपनी आत्मरक्षा और संपन्न होने के कार्यों को करने की निहायत जरूरत है. सरकार को ऐसी स्थिति में देश में काम करनेवाली सुरक्षा तकनीकी को निजि हाथों में नहीं देना चाहिए, यह कार्य सरकार को अपने हाथों में रखना चाहिए, क्योंकि निजि हाथों में जाने से देश की सुरक्षा को खतरा होगा. जब चीन इतने गुपचुप से आयुध बनाने में व्यस्त है, तब भारत सरकार को भी अपने सुरक्षा के उपायों को सार्वजनिक नहीं करना चहिए.

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