चीन से सावधानः भारत को चीन की नई चुनौती!

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भगवती प्रसाद डोभाल (संपादकीय)

चीन ने अपने सीमाओं को भारत से सुरक्षित रखने के लिए कानून बनाया है. हाल ही में चीन ने संप्रभुता औ राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत करने के लिए अपनी राष्ट्रीय एसेंबली में एक कानून पास करवाया है, इस कानून का मुख्य उद्येश्य ही ऐसा है, जो अपनी सीमाओं को भारत से सुरक्षित रखने के लिए बहुत बड़ा हथियार है. इस कानून से वह अपने आत्मबल को मजबूत करने की तैयारी कर चुका है. अब भविष्य में इस कानून के जरिए अपने बार्डर की सुरक्षा कैसे करता है, वह समय ही बताएगा, पर बीच-बीच में जब वह भारत की सीमा में घुसता है, तो उससे चीन के इरादे भारत की और जमीन हथियाने से है. यह कानून जो उनकी राष्ट्रीय विधायिका ने पास किया है, उसे चीन जनवरी से लागू करेगा.

चीनी कानून कितना कारगर

चीन की सीमा का नया कानून कितना कारगर है, यह तो आगे उसके इरादों से स्पष्ट होगा, पर सीमा पर भारत के साथ बातचीत में चीन नए तरीके से अपने पक्ष को रखने की कोशिश करेगा. इसकी यह विस्तरवादी नीति नई नहीं है, वह अपने लक्ष्य में निरंतर आग ही बढ़ रहा है. यदि चीन के इतिहास पर भारत के स्वतंत्र होने के बाद से नजर दौड़ाएं तो वह इस बात के लिए कभी राजी नहीं हुआ कि भारत से सटी उसकी सीमा स्थाई है. प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को 1959 के वांडुंग सम्मेलन में हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा बुलंद करने वाले चीन ने 1962 की दीवाली में ऐसा कर दिखाया, जो एक दोस्त को कभी नहीं करना चाहिए. भाई के साथ धोखेबाजी का यह इतिहास में जीता-जागता उदाहरण है.

1962 में चीन का भारत पर अचानक थोपे युद्ध ने पंडित नेहरू सहित पूरे राष्ट्र को स्तब्ध किया. चीन के बारे में यह सोचा ही नहीं गया था कि वह इतनी बड़ी धोखे बाजी करेगा. देश की सेना इस अचानक युद्ध के लिए तैयार नहीं थी. न ही भारत सरकार को इसकी उम्मीद थी. हजारों वर्ग किलोमीटर भारतीय भू-भाग अभी भी चीन कब्जाए हुए है. इसकी यह भूख शांत नहीं हुई, वह किसी न किसी तरह से अरुणाचल को हथियाने की कोशिश में है. चीन ने अरुणाचल बार्डर के पास एक शहर बसाया है, और उस स्थान तक बुलट ट्रेन चलाने की योजना पूरी होने जा रही है. साथ ही सीमा के साथ-साथ गांव बसाने की योजना है.


सिक्किम का विलय पचाना चीन के लिए मुश्किल !

प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने जब स्वतंत्र देश सिक्किम का विलय भारत में किया, तब से चीन कोशिश कर रहा है कि वह भारत के किसी अन्य भाग को हथिया लूं, इसी कड़ी में वह अरुणाचल पर नजरे गाड़े हुए है. और चाहता है कि भारतीय सीमा के जितने भी जिले हैं, उनको अपनी झोली में डालूं. बीच-बीच में उत्तराखंड के सीमांत जिलों में भी घुसपैठ करता रहा है. हाल ही की चीन की घुसपैठ चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में हुई है.


70 वर्षों की फसल काट रहे हैं!

श्रीमान प्रधानमंत्री मोदीजी, आप उस रट को छोड़िए कि नेहरू ने देश के लिए कुछ नहीं किया, सिर्फ मैंने ही इन सात वर्षों में भारत को दुनिया के शिखर पर पहुंचा दिया. इस गलत फहमी को त्याग कर वास्तविकता के धरातल में पैर रखिए. श्रीमन्, आपको, जो भारत की यह सत्ता मिली है. इसने बहुत सारी कठिनाइयां झेली हैं, और कदम-कदम पर आजादी के बाद, देश उन्नत होने के लिए विभिन्न नेताओं के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा है. आप तो सिर्फ इन सात वर्षों में पिछले 70 वर्षों से किए गए संघर्ष से पैदा हुई फसल को काट रहे हैं.

चीन और पाकिस्तान की बुरी नजर को विमुख करने पर जोर डालिए. वह कभी भी देश को युद्ध में झोंक सकते हैं. अपने देश के नेताओं को गरियाने से कोई फायदा नहीं होगा. उनके किए पर पानी मत फेरिए.

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