चालबाज मुख्तार के सभी पैतरे हुए फेल, पहुंचा बैरक नं.-15 बांदा जेल!

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पंजाब की रोपड़ जेल से ना शिफ्ट होने के दुर्दांत अपराधी मुख्तार अंसारी के लाख पैतरे फेल होने के बाद आखिरकार 14 घंटे का सफर तय कर यूपी के बांदा जेल पहुंच गया. सुरक्षा के भारी तामझाम के बीच मुख्तार अंसारी का काफिला सुबह करीब 4.26 मिनट पर बांदा जेल पहुंच गया. बता दें, यूपी पुलिस ने मुख्तार को रोपड़ जेल से मंगलवार (6 अप्रैल) की दोपहर करीब 2.20 बजे लेकर रवाना हुई थी. इस दौरान 10 गाड़ियों के काफिले में 150 पुलिसकर्मी मुस्तैद रहे.

14 घंटे का सफर मुख्तार पहुंचा अंदर

बांदा जेल के अंदर मुख्तार की एम्बुलेंस और सुरक्षा गाड़ी को ही दाखिल होने दिया गया. यहां मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल द्वारा गठित 4 डॉक्टरों की टीम ने उसका मेडिकल परीक्षण किया. फिर सामान की तलाशी ली गई. यह प्रक्रिया करीब आधे घंटे चली. इसके बाद मुख्तार को बैरक नंबर-15 भेज दिया गया. बता दें, 26 महीने बाद मुख्तार को यूपी सरकार वापस अपनी जेल में लेकर आई है. इस दौरान पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल तक के सभी जिलों में अलर्ट घोषित किया गया था.

बता दें, मुख्तार अंसारी के भाई और गाजीपुर से बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी ने इस मामले में यूपी सरकार पर सवाल उठाए हैं, उन्होंने कहा कि बांदा जेल में मुख्तार को चाय में जहर देकर मारने की कोशिश की जा चुकी है. हालांकि उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताया.

मुख्तार को रोपड़ जेल से यूपी पुलिस को हैंडओवर करने से पहले उसकी कोरोन जांच की गई. रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू की गई. यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने एक सावर्जनिक रैली में यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि मुख्तार की गाड़ी यूपी के बार्डर में पलट सकती है. गैंगस्टर विकास दुबे की तरह यह गाड़ी यूपी के किस बॉर्डर पर पलटेगी, यह नहीं बताएंगे. इसे लेकर मुख्तार की पत्नी अफशां अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि उनके पति का हाल विकास दुबे जैसा हो सकता है, इसलिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए.

मुख्तार को 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सौंपने का आदेश दिया था. यूपी पुलिस ने मुख्तार को लाने का प्लान नहीं बताया था. यानी इसका खुलासा नहीं किया था कि वो रोपड़ से बांदा तक उसे किस रास्ते से लेकर आएगी. जो टीम मुख्तार को बांदा लेकर आई उसमें एक सीओ, दो इंस्पेक्टर, छह सब इंस्पेक्टर, 20 हेड कॉन्स्टेबल, 30 कॉन्स्टेबल और एपीसी की एक कंपनी शामिल थी. पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य हाइटेक सुविधाओं से लैस थे, ताकि हर परिस्थिति का सामना किया जा सके.

बता दें, कोरोना के चलते मुख्तार अभी अपने परिजनों ने नहीं मिल पाएगा. मुख्तार को जिस बैरक में रखा गया है, उसके आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. लखनऊ में एमपी एमएलए (सांसद-विधायक) की विशेष अदालत ने 12 अप्रैल को अभियुक्त मुख्तार अंसारी को साल 2,000 में कारापाल और उप कारापाल पर हमला करने, जेल में पथराव और जानमाल की धमकी देने के मामले में आरोप तय करने के लिए व्यक्तिगत रूप से तलब किया है.

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