किसान आंदोलन पर अमेरिका ने दिया मोदी सरकार का साथ, भारत ने कहा- गणतंत्र दिवस पर हिंसा कैपिटल हिल जैसा मामला

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एजेंसी : किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर पॉप स्टार रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट के बाद हाल ही में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया था. इसमें भारत के आंतरिक मसलों में दखल देने वाले विदेशी ताकतों को कड़ी चेतावनी दी गई थी. हालांकि, इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी कृषि कानून से लेकर किसान आंदोलन और इंटरनेट शटडाउन के मुद्दे पर भारत को नसीहतें दी थीं. अब भारत ने भी अमेरिका की बात का जवाब दिया है और दिल्ली में 26 जनवरी के दिन हुई हिंसा की तुलना अमेरिका में 6 जनवरी को हुई कैपिटल हिल की हिंसा से कर दी.

भारत में जारी किसान आंदोलन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में अमेरिका के नए प्रशासन ने गुरुवार को कहा कि वह दोनों पक्षों (केंद्र सरकार और किसान संगठनों) के बीच वार्ता के जरिए मतभेदों के समाधान को प्रोत्साहित करता है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किसी भी सफल लोकतंत्र की विशेषता हैं.

इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी प्रदर्शन को लोकतांत्रिक और राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में तथा गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार और संबद्ध किसान संगठनों के प्रयासों को अवश्य ही देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को हिंसा की घटनाओं, लालकिले में तोड़फोड़ ने भारत में उसी तरह की भावनाएं और प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कीं, जैसा कि छह जनवरी को (अमेरिका में) कैपिटल हिल घटना के बाद देखने को मिला था. साथ ही, भारत में हुई घटनाओं से हमारे संबद्ध स्थानीय कानूनों के मुताबिक निपटा जा रहा है.

श्रीवास्तव ने कहा कि हमने अमेरिकी विदेश विभाग की टिप्पणियों पर गौर किया है. इस तरह की टिप्पणियों को उसी संदर्भ में देखने की जरूरत है, जिस संदर्भ में वे की गई हैं और उन्हें संपूर्णता में देखे जाने की भी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका साझा मूल्यों वाले अनूठे लोकतंत्र हैं.

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