प्रधानमंत्री मोदी और ममता बनर्जी के झगड़े में फंसे अलपन बंदोपाध्याय, दिल्ली हुआ तबादला

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Alpan Bandopadhyay

केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहा तकरार थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बार बढ़ता जा रहा है. इस बार टकराव की वजह ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले पश्चिम बंगाल के मुख्‍य सचिव अलपन बंदोपाध्याय हैं. दरअसल, केंद्र सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय के दिल्ली तबादले का आदेश जारी किया है, उन्हें 31 मई सोमवार को सुबह 10 बजे दिल्ली स्थित कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय में रिपोर्ट करना है. इसी बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अलपन बंदोपाध्याय अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं या फिर वो रिटायरमेंट ले सकते हैं. बता दें, बीते शुक्रवार को केंद्र सरकार ने उनकी सर्विस मांगी थी और राज्य सरकार से कहा था कि वह उन्हें तुरंत कार्यमुक्त करें.

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बता दें, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव के तौर अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो रहा था. उससे पहले ही ममता सरकार ने 3 महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी करके 31 मई को सुबह 10 बजे से पहले रिपोर्ट करने के लिए कह दिया है.

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मामूल हो कि अलपन बंदोपाध्याय ने पिछले साल अक्टूबर में मुख्य सचिव का पद संभाला था. इसी महीने उनकी उम्र 60 साल हो गई. 24 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि अलपन का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. ममता ने कहा था कि केंद्र सरकार उनका कार्यकाल तीन महीने और बढ़ाने पर सहमत हो गई है.

विधानसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग ने अलपन बंदोपाध्याय का तबादला कर दिया था, लेकिन चुनाव बाद तृणमूल कांग्रेस की तीसरी बार सरकार बनी तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अलपन बंदोपाध्याय को दोबारा मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया. बीते शुक्रवार को अलपन बंदोपाध्याय जब ‘यास’ तूफान से राहत के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गईं तो अलपन बंदोपाध्याय भी उनके साथ थे.

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1986 बैच के आईएएस अलपन बंदोपाध्याय ने राज्य में विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर काम किया है, उन्होंने कोलकाता नगर पालिका के आयुक्त के पद के अलावा परिवहन और उद्योग विभाग में भी काम किया है. मुख्यमंत्री ने कोविड से निपटने में उनकी भूमिका की भी सराहना की थी.

बीते शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘यास’ चक्रवात को लेकर बुलाई गई समीक्षा बैठक के बाद से शुरू हुआ. दरअसल, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय, दोनों करीब आधे घंटे देरी से बैठक में पहुंचे थे. इस बैठक में पहले से प्रधानमंत्री मोदी के अलावा दो केंद्रीय मंत्री और शुभेंदु अधिकारी मौजूद थे, जिससे ममता की नाराजगी का कारण माना गया.

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