पंजाब के बाद कर्नाटक में सियासी हलचल, सीएम पद को लेकर सिद्धारमैया ने कही यह बात

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पंजाब में चल रहे कांग्रेस पार्टी का विवाद अभी थमा ही नहीं कि उसके सामने एक और बड़ी चुनौती आ गई. दरअसल पंजाब के बाद अब कर्नाटक में दो कद्दावर नेताओं के बीच खींचतान की खबरें सामने आ रही है. ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की राह आसान नहीं होने वाली है.

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव होने में अभी काफी वक्त है, लेकिन यहां पर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सियासत गरमा गई है. हालांकि कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने इस तरह की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि साल 2023 में होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के चेहरे का अभी तक कोई जिक्र नहीं हुआ है, उन्होंने कहा कि चुनाव होने में अभी करीब दो साल का समय शेष बचा है, उन्होंने कहा चुनाव होगा नए विधायक आएंगे और उनकी राय के आधार पर आलाकमान तय करेगा कि राज्य का मुख्यमंत्री कौन होगा? फिलहाल अभी इस पर चर्चा करना व्यर्थ होगा.

बता दें, देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा की जनता दल पार्टी (सेक्युलर) से निष्कासित होने के बाद सिद्धारमैया साल 2006 में अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे. साल 2013 में वह मुख्यमंत्री बनें. इन दिनों 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान सीएम चेहरे के मुद्दे ने पार्टी के भीतर दरार बढ़ा दी है. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार और विधायक दल के नेता सिद्धारमैया के बीच एकतरफा खेल शुरू हो गया है.

हाल ही में, पार्टी नेतृत्व के फरमान के बावजूद कई विधायकों ने खुले तौर पर मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में सिद्धारमैया का समर्थन किया था. इस समर्थन ने शिवकुमार को नाराज कर दिया था, जो मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा भी पाल रहे हैं.

मामलू हो, मौजूदा कर्नाटक राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष रक्षा रमैया और उनके प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद हारिस नलपद के बीच विवाद और गहरा हो गया है, जिससे पार्टी आलाकमान को इसे सुलझाने के लिए कदम उठाना पड़ा है. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व मंत्री एम.आर. सीताराम के पुत्र रक्षा को सिद्धारमैया का समर्थन प्राप्त है, जबकि विधायक एन.ए. हारिस के पुत्र मोहम्मद हारिस नलपद को शिवकुमार का समर्थन प्राप्त है.

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