एक ऐसा क्रिकेटर जिसके नाम दर्ज है कई कीर्तिमान, विश्व युद्ध में दी सेवाएं, फिर हत्या के जुर्म में जाना पड़ा जेल!

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क्रिकेट जगत में ना जाने कितने ऐसे खिलाड़ी, जिन्होंने कई कीर्तिमान अपने नाम दर्ज किए है. कई ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्हें सिर्फ वहीं लोग जानते है, जिनके अंदर क्रिकेट का क्रीड़ा हो. आज हम जिस क्रिकेटर की बात कर रहे है उससे बहुत कम ही लोग जानते होंगे. क्योंकि उसना नाम आज से तकरीबन 100 साल पहले खूब चर्चा में थे. हालांकि इस खिलाड़ी का नाम जैक हॉब्स, लेन हटन या डॉन ब्रैडमैन जैसा नहीं है, मगर फिर भी क्रिकेट की दुनिया में उसके नाम कई कीर्तिमान दर्ज है. वैलंस जप, ये वो खिलाड़ी है जिसने उस दौर में कई शानदार प्रदर्शन किए और अपने दौर में बेहरतीन ऑलराउंडरों रहे. क्रिकेट मैदान पर रनों और विकेटों का ढेर लगाने वाले वैलेंस को हत्या जैसे जुर्म में जेल भी जाना पड़ा था. क्या थी वो कहानी? चालिए जानते हैं.

27 मार्च 1891 को इंग्लैंड के ससेक्स के बर्गेस हिल्ले इलाके में जन्में वैलंस जप. अब इस दुनिया में नहीं रहे. वैलंस जप को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था और वह अपने स्कूल के लिए क्रिकेट खेलना करते थे यहीं से उनका ससेक्स काउंटी की टीम में सलेक्शन हो गया. 1909 में ससेक्स की ओर से जप ने अपने फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत की. अगले 3-4 सालों में वैलंस ससेक्स की टीम का नियमित हिस्सा बन गए और रनों की ढेर लगाने लगे. सिर्फ इतना ही विकेट भी उनके खाते में गिरते रहे.

पहले विश्व युद्ध में भी हुए शामिल

यह वह दौर था जब ब्रिटेन में कई क्रिकेटरों को विश्व युद्ध की वजह से सेना के साथ भी अपनी सेवाएं देनी पड़ी थीं. वैलंस भी इससे अलग नहीं रह सकते थे. इसलिए 1914 में उन्हें रॉयल इंजीनियर्स में शामिल कर लिया गया, उन्होंने कई अलग-अलग जगहों में सेवा दी और फिर रॉयल एयर फोर्स का हिस्सा भी बन गए. 1919 में विश्व युद्ध खत्म होने के बाद एक बार फिर वैलंस क्रिकेट की ओर लौट गए.

ससेक्स छोड़ नॉर्थंप्टशर पहुंचे

वैलंस के करियर में असली बदलाव 1921 में आया, जब उन्होंने नॉर्थंप्टनशर के साथ जाने का फैसला किया. नॉर्थंप्टनशर उस दौर में सबसे कमजोर टीम थी, लेकिन इसके बावजूद वैलंस का प्रदर्शन हमेशा शानदार रहा. वैलंस लगातार रनों का अंबार लगा रहे थे और अपनी धीमी ऑफ ब्रेक से विकेट भी हासिल कर रहे थे.

7 साल में 8 टेस्ट, नहीं डाल पाए असर

1921 में ही वैलंस को इंग्लैंड के लिए टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नॉटिंघम में हुए इस मैच में वैलंस का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा. यही स्थिति उनके पूरे टेस्ट करियर की रही, जो 7 साल तक चला और सिर्फ 8 टेस्ट मैच खेले. इनमें उन्होंने सिर्फ 208 रन बनाए और 28 विकेट ही लिए. लेकिन सफलता सिर्फ चुनिंदा लोगों के हाथ ही लगती है और टेस्ट करियर के हिसाब से वैलंस के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ.

लगातार 10 सीजन में रन और विकेटों का ढेर

फिर भी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वह रन बरसाते रहे. वैलंस नॉर्थंप्टनशर जैसी टीम की ओर से भी खेलते हुए खूब रन बटोरते रहे. 1921 में वैलेंस ने 2 हजार से ज्यादा रन बनाए थे, जबकि 121 विकेट भी हासिल किए थे. वैलंस की प्रदर्शन का अंदाजा इस बात से लगाया ज सकता है कि अपने फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने 10 बार एक सीजन में एक हजार रन और सौ से ज्यादा विकेट लेने का कमाल किया. वैलंस ने अपने फर्स्ट क्लास करियर में 529 मैच खेले, जिसमें उनके बल्ले से 23296 रन निकले. इनमें 30 शतक और 120 अर्धशतक शामिल थे. इतना ही नहीं, उन्होंने 1658 विकेट भी अपने नाम किए. इस दौरान वैलंस ने 5 बार हैट्रिक भी झटकी. 1928 सीजन में तो उन्होंने 166 विकेट झटक डाले थे.

सड़क दुर्घटना, मौत और हत्या के जुर्म में जेल

वैलंस 1938 में रिटायर होने तक नॉर्थंप्टन के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते रहे. लेकिन इस करियर के दौरान एक बार उन्हें बेहद बुरे हालात का सामना करना पड़ा. बात जनवरी 1935 की है. वैलंस नॉर्थंप्टन में एक क्लब से घर लौट रहे थे. इस दौरान वह अपनी कार चला रहे थे. एक गाड़ी से आगे निकलने की कोशिश में उनकी गाड़ी की सीधी टक्कर सामने की ओर से आती हुई एक मोटरसाइकिल से हो गई. वैलंस और मोटरसाइकिल चालक को इसमें चोटें आईं, लेकिन हालात उस वक्त बिगड़े, जब मोटरसाइकिल पर सवाल दूसरे शख्स की घटनास्थल पर ही मौत हो गई.

मोटरसाइकिल सवार ने वैलंस के खिलाफ मुकदमा किया और आरोप लगाया कि वह सही तरीके से गाड़ी नहीं चला रहे थे और उल्टी दिशा में आ रहे थे. वैलंस के वकील ने बचाव में दलील दी कि यह जानबूझकर नहीं था और न ही वह शराब के नशे में थे. हालांकि, जज ने किसी भी दलील को नहीं माना और उन्हें हत्या के जुर्म में 9 महीने की जेल की सजा दी गई और 2 साल के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया. हालांकि, अच्छे बर्ताव के कारण वैलंस को सजा पूरी करने से पहले ही छोड़ दिया गया और कुछ महीनों बाद वह फिर अपनी टीम के लिए खेलने लौटे. 1938 में वैलंस ने क्रिकेट से विदा ली. 9 जुलाई 1960 को 69 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

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