भारत के ‘हिंदू राष्ट्र’ बनते ही 15 देश खुद को घोषित कर देंगे ‘हिंदू राष्ट्र’, जानिए किसने की ऐसी भविष्यवाणी

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भारत के ‘हिंदू राष्ट्र’ बनने को लेकर पूरी के गोवर्धनपीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भविष्यवाणी की है, उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही ‘हिंदू राष्ट्र’ बन जाएगा. भारते के ‘हिंदू राष्ट्र’ बनते ही दुनिया के 15 देश खुद को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित कर देंगे. उनका मानना है कि ये देश केवल भारत के आगे आने का इंतजार कर रहे है इसी वजह से रूके हैं. हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस तरह का कोई बयान दिया हो, इससे पहले भी उन्होंने इसी साल के शुरूआत में कहा था कि 2025 तक भारत ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित हो जाएगा.

जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज का 20 जून 1943 को पूर्वी बिहार प्रांत के मिथिलांचल में दरभंगा यानी मौजूदा वक्त में मधुबनी जिले के हरिपुर बख्शीटोलमानक गांव के लालवंशी झा परिवार में हुआ था. इनके पिता कुलभूषण दरभंगा नरेश के राज पंडित थे. इनकी माताजी का नाम गीता देवी था. स्वामी निश्चलानंद के बचपन का नाम नीलाम्बर था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा बिहार और दिल्ली में पूरी हुई. 10वीं तक इन्होंने बिहार में विज्ञान की. इसके बाद दो वर्षों तक तिब्बिया कॉलेज दिल्ली से पढ़ाई की. स्वामी निश्चलानंद बिहार और दिल्ली में छात्रसंघ विद्यार्थी परिषद के उपाध्यक्ष और महामंत्री भी रहे.

बडे़ भाई पंडित श्रीदेव झा के कहने पर इन्होंने दिल्ली में सर्व वेद शाखा सम्मेलन के अवसर पर धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज और श्री ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी कृष्णबोधाश्रम जी महाराज का दर्शन प्राप्त कि,। उन्होंने करपात्री महाराज को दिल से अपना गुरूदेव मान लिया. तिब्बिया कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही इनके मन में संन्यास की भावना अत्यंत तीव्र होने लगी. तब वे बिना किसी को बताए काशी के लिए पैदल ही चल पड़े. इसके बाद इन्होंने काशी, वृन्दावन, नैमिषारण्य, बदरिकाआश्रम, ऋषिकेश, हरिद्वार, पुरी, श्रृंगेरी आदि प्रमुख धर्म स्थानों में रहकर वेद-वेदांग आदि का गहन अध्ययन किया. इन्होंने 7 नवंबर 1966 को दिल्ली में देश के अनेक वरिष्ठ संत-महात्माओं एवं गौभक्तों के साथ गौरक्षा आंदोलन में भाग लिया.

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज का कहना है कि हमें सनातनी परंपरा का पालन कर लोगों के बीच इसका प्रचार प्रसार करना होगा. भारत में निवास करने वाले सभी नागरिकों के पूर्वज हिंदू हैं. वह सनातन धर्म से पोषित हैं, उन्हें अपने अतीत का स्मरण कराकर वापस लाना होगा. निश्चलानंद सरस्वती के अनुसार हिंदी में ही संस्कृत का समावेश है. वेद और पुराण का हिंदी वर्जन सनातन धर्म को सही तरीके से परिभाषित करता है. इसलिए हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार भी जरुरी है, उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजनीतिक परिस्थिति भी भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की हिमायती है.

भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा, ‘यदि भारत हिंदू राष्ट्र घोषित होता है तो विश्व के 15 देश एक साल के भीतर अपने को हिंदू राष्ट्र घोषित कर लेंगे. इन देशों का मानना है कि भारत की दिशाहीनता की वजह से उनके हाथ बंधे हैं.’

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