हिंसा के बाद किसान हुए अनपढ! किसान तो अनपढ़ थे रास्तों के बारे में जानकारी नहीं- टिकैत

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आज सुबह सुबह टीवी पर एक न्यूज देख रहा था किसान नेता राकेश टिकैत की बाइट चल रही थी..जिसमें टिकैत ये कहते हुए दिखाई दे रहे थे कि… ट्रैक्टर अशिक्षित किसान चला रहे थे। उन्हें दिल्ली का रास्ता तक पता नहीं था। प्रशासन ने उन्हें दिल्ली का रास्ता बताया। वे दिल्ली तक गए और फिर वापस लौट आए। उनमें से कुछ भूलवश लाल किले की तरफ चले गए। पुलिस ने उन्हें इसके बाद घर लौटा दिया…सही बात है भूलवश ये जो शब्द है जिसने भी इस श्द का ईजाद किया होगा बहुत ही जादा होशियार होगा क्योकी इस शब्द के पीछे खराब से खराब बड़े से बड़े जुर्म को छिपाने की कोशिश की जाती है औक कई मायनों में तो लोग इसी शब्द की आंड़ में बच भी जाते है…खैर दिल्ली पुलिस जाच कर रही है कि ये अनपढ किसान, आज अनपढ कैसे हो गए…इस तस्वीर को देखकर आप क्या कहेगें एक पुलिस वाला है जो अपनी बाइत स्टार्ट कर रहा है..बईक स्टार्ट होती तभी एक अनपढ़ डंडा लेकर वहा पहुच जाता है और पुलिस वाले को अपन जान माल को वही छोड़कर बचानी पड़ती है..वाह से अनपढ किसान.. पूर्वजों कहा करते थे की खाली दिमाग शैतान का गर…मतलब की जब सब कुछ फ्रि में मिलने लगेगा तो ताकत का इस्तेमाल कहा करोगे कहीं न कही तो दिखाना ही पड़ेगा…ये सारे अनपढ़ किसान अभी तक प्रि की मैगी, जलेबी, समोसा, केला,संतरा, सेब, विस्लेरी का पानी मुफ्त का लंगर खा रहे थे तो खा खा कर मोटे हो गए थे ताकत जादा हो गई थी ताकत का प्रदर्शन कही न कही तो करना ही था तो दिल्ली पुलिस पर दी कर दी….इस तस्वीर को देखिए दिल्ली पुलिस के जवानों को ये अनपढ किसान किस तरह से बंधक बना कर मारते हुए दिखाई दे रहे है…पुलिस का जवान हाथ जोड़कर रहम की भीख मांग रहा है…ये तस्वीर गंणतंत्र दिवस के दिन गणतंत्र की धज्जीया उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है…इन अनपढ़ किसानों ने दिल्ली पुलिस के करीब 150 जवानों को अस्पताल में पहुचा दिया है..कईयों के हाथ टूटे है और कईयों के पैर और इन सबसे बचने के लिए राकेश टिकैत, भूलवश और अनपढ़ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर के बचने की कोशिश कर रहे है दरसल इनके राकेश टिकैत शुरु से ही जिस तरह से बेबाकी से अपनी राय रखते आए है इसे देखकर ये कहना गलत नहीं होगा की राकेश टिकैत एक ऐसी भीड़ के मुखिया बनने की कोशिश कर रहे थे जिस पर उनका कोई नियंत्रण ही नही था..और तीर कमान से निकल जाने के बाद बचने के लिए किसानों को अनपढ़ कह रहे है.

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