चमोली हादसाः सुरंगें बन गईं मौत का कुआं, शवों का मिलना जारी, अभी भी 174 लापता, खोजने के लिए ड्रोन का हो रहा इस्तेमाल

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उत्तराखंड के चमोली जिले दो दिन पहले ग्लेशियर टूटने के कारण आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. यहां तपोवन और ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट साइट की सुरंगों के अंदर भारी गाद होने के कारण वहां फंसे 30-35 लोगों को बचाने की मुहिम धीमी हो गई. अभी तक आपदा में लापता 32 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं. वहीं, 174 अन्य अभी लापता हैं.

एनटीपीसी के 520 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की इस घुमावदार सुरंग में बचाव कार्य उस समय धीमा पड़ गया, जब अंदर से भारी मात्रा में गाद निकलने लगी और आगे जाना मुश्किल हो गया. फिलहाल उत्खनन के लिए लाई गई मशीनों के जरिए 1.9 किमी लंबी सुरंग से दिन-रात गाद निकालना जारी रखा गया है. बचाव अभियान में लगे अधिकारियों ने बताया कि सुरंग का डिजाइन जटिल है, जिसे समझने के लिए एनटीपीसी के अधिकारियों से संपर्क साधा गया है.

गढ़वाल डीआईजी नीरू गर्ग के मुताबिक, मंगलवार को जो छह शव बरामद हुए, उनमें से चार रैनी गांव में ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट से मिले. वहीं एक शव चमोली और दूसरा नंदप्रयाग से था. इनमें से दो शव पावर प्लांट में तैनात पुलिसकर्मियों के हैं.

राहत-बचाव कार्य के लिए लगाई गई एजेंसियां अब सुरंग में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद लेने में जुट गई हैं. इनमें सुरंग के ऊपर हेलिकॉप्टर से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स इमेजर के जरिए अंदर फंसे लोगों का पता लगाने की कोशिश जारी है. साथ ही कैमरे वाले ड्रोन्स को भी सुरंग के अंदर भेजा जा रहा है. साइट पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, हैदराबाद के नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक लेजर इमेजर भी भेजा है, जिसे हेलिकॉप्टर से लटकाकर लेजर के जरिए अंदर फंसे लोगों का पता लगाया जा सकता है.

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