किसान आंदोलन: कुछ ही घंटों में नरेश टिकैत फिर हुए बगावती, कहा- जब तक कृषि कानून वापस नहीं, तब तक घर नहीं लौटेंगे

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26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में किसान परेड के दौरान हुई हिंसा की घटना के बाद योगी सरकार भी एक्शन में आ गई है. यूपी में इसकी पुनरावृत्ति न हो इसके लिए कदम उठाए गए हैं. इस बाबत सभी जिलों के डीएम और एसपी को प्रदर्शनस्थलों को खाली कराने के निर्देश दिए गए थे. हालांकि, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर से हटने से इनकार कर दिया. पहले प्रदर्शन खत्म करने की बात करने वाले उनके भाई नरेश टिकैत के सुर भी अब बदल गए हैं, उन्होंने कहा है कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे, तब तक वे और उनके समर्थक घर नहीं लौटेंगे.

इससे पहले गाजियाबाद डीएम ने गाजीपुर में प्रदर्शनकारियों को देर शाम तक जगह खाली करने का आदेश दिया. ऐसा नहीं किए जाने पर जबरदस्ती हटाने की चेतावनी भी दी गई थी. इसी के मद्देनजर प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है. राज्य के ADG(कानून-व्यवस्था) ने बताया कि 26 जनवरी को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कुछ किसान संगठनों ने स्वेच्छा से चिल्ला बॉर्डर,दलित प्रेरणा स्थल से आंदोलन वापस ले लिया. बागपत में लोगों को समझाने के बाद उन्होंने रात में धरना खत्म कर दिया. UP गेट पर अभी कुछ लोग हैं, उनकी संख्या काफी कम हुई है.

सख्त कदम उठाते हुए योगी सरकार ने राज्यों में तीन प्रदर्शन स्थल से किसानों को हटा दिया है. मालूम हो कि किसान चिल्ला बॉर्डर, राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल और ग्रीन गार्डन नोएडा में प्रदर्शन कर रहे थे साथ ही बागपत के बड़ौत में भी विरोध प्रदर्शन चल रहा था. बागपत के एडीएम अमित कुमार सिंह के मुताबिक नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था. पत्र में कहा गया था कि प्रदर्शन से हाइवे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है. NHAI ने योगी सरकार से मामले में मदद मांगी थी. एडीएम ने कहा कि हमने शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली-सहारनपुर हाइवे से प्रदर्शनकारियों को हटाया है.

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